नई दिल्ली स्थित स्कोप कन्वेंशन सेंटर में 11 फरवरी को केन्द्रीय सतर्कता आयोग द्वारा आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में एसईसीएल की डिजिटल पहल डिजीकोल डिजीकोल को सार्वजनिक उपक्रमों में पारदर्शिता एवं जवाबदेही का प्रभावी उदाहरण बताया गया।
इस अवसर पर एसईसीएल के सीवीओ हिमांशु जैन ने कहा कि डिजीकोल पहल को सतर्कता दृष्टिकोण से इस तरह विकसित किया गया है कि प्रत्येक प्रमुख खनन गतिविधि डिजिटल निगरानी एवं डेटा आधारित नियंत्रण के दायरे में आ सके।
उन्होंने कहा कि HEMM फ्लीट मॉनिटरिंग सिस्टम के माध्यम से भारी खनन उपकरणों की रियल-टाइम ट्रैकिंग से ईंधन खपत, परिचालन समय एवं मार्ग विचलन जैसी संभावित अनियमितताओं की स्वतः पहचान संभव हुई है, जिससे पारदर्शिता के साथ-साथ जवाबदेही भी सुनिश्चित हो रही है।
हिमांशु जैन ने बताया कि वीडियो एनालिटिक्स कनेक्टेड वर्कर सिस्टम एवं ड्रोन आधारित सर्वेक्षण जैसी तकनीकों से सुरक्षा प्रबंधन अतिक्रमण नियंत्रण और परिचालन अनुशासन को सुदृढ़ किया गया है, जिससे जोखिमों को पहले ही चिन्हित किया जा सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि डेटा-ड्रिवन माइन प्लानिंग एवं वैज्ञानिक ड्रिलिंग-ब्लास्टिंग प्रणाली ने निर्णय-प्रक्रिया को अधिक वस्तुनिष्ठ बनाया है और मानवीय हस्तक्षेप की संभावना को न्यूनतम किया है।
डिजिटल इकोसिस्टम पर प्रकाश डालते हुए सीवीओ ने कहा कि “डिजिटल भूमि अभिलेख ऑनलाइन प्रशिक्षण प्लेटफॉर्म स्पेयर प्रबंधन प्रणाली और डिजिटल वॉर रूम जैसी पहलें मिलकर एक सुरक्षित, एकीकृत एवं टैम्पर-प्रूफ व्यवस्था तैयार कर रही हैं, जो सतर्कता उद्देश्यों के अनुरूप है।
सीवीओ हिमांशु जैन ने कहा कि डिजीकोल पहल यह सिद्ध करती है कि तकनीक के माध्यम से सार्वजनिक संसाधनों के उपयोग में पारदर्शिता, दक्षता और उत्तरदायित्व को एक साथ सुनिश्चित किया जा सकता है। यह मॉडल अन्य सार्वजनिक उपक्रमों के लिए भी अनुकरणीय है।
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