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February 10, 2026 8:44 pm

इंटेलेक्‍चुअल सोसाइटी ऑफ मीडिया प्रोमोटर्स की दो दिवसीय संगोष्‍ठी में वक्ताओं ने रखे विचार भाषायीअस्मिता की राजनीति से बचें : डॉ. अनिलदुबे


वर्धा, 10 फरवरी 2026 : स्वाधीनता आंदोलन में संपर्क भाषा के रूप में और भारत की संस्कृति को समझने के लिए हिंदी महत्वपूर्ण भाषा बनी। भारत में अलग-अलग राज्यों में विभिन्न भाषाओं के प्रयोग होने के कारण भाषा को लेकर अस्मिता की राजनीति होती रही है। हमें भाषायी राजनीति से बचना चाहिए।
यह विचार महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त एसोशिएट प्रोफेसर डॉ. अनिल कुमार दुबे ने व्यक्त किए। वे इंटेलेक्‍चुअल सोसाइटी ऑफ मीडिया प्रोमोटर्स की ओर से आयोजित दो दिवसीय (7 एवं 8 फरवरी) द्वितीय वर्धा एजीएम विरासत मीडिया प्रमोटर्स संगोष्‍ठी में
‘हिंदी भाषा का विवाद और संकीर्ण राजनीतिक भाव’ विषयक सत्र में बोल रहे थे। राष्‍ट्रभाषा प्रचार समिति के सभागार में शनिवार को संगोष्ठी के उद्घाटन के बाद विभिन्न सत्रों का आयोजन किया गया। डॉ. दुबे ने अपने उद्बोधन में भाषावार प्रांत रचना, भाषा को लेकर सहयोग व संघर्ष, राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भाषाओं को दिया गया महत्व, कृत्रिम बुद्धि और भाषाओं की चुनौतियां आदि को केंद्र में रखकर अपने विचार व्यक्त किए।

महात्मा गांधी और स्वतंत्रता संग्राम के समय पत्रकारिता का स्वरूप’ विषय पर चंद्रपुर के वरिष्ठ पत्रकार व लेखक राजेश मडावी ने कहा कि स्वतंत्रता के समय की पत्रकारिता ने लोकतांत्रिक मूल्यों को सामाजिक व्यवस्था में रोपित करने का काम किया व जनसंघर्ष को ऊर्जा दी। मुख्य धारा का मीडिया स्वाधीनता संघर्ष का आवाज़ बना। 1930 से 1947 के गांधी युग की पत्रकारिता ने विविधता को कायम रखने में योगदान दिया। उन्होंने कहा कि हमें गांधी युग की पत्रकारिता की विरासत को आगे ले जाना चाहिए। इसी विषय पर महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राजेश लेहकपुरे ने कहा कि गांधी की पत्रकारिता विश्व पत्रकारिता में एक आदर्श उदाहरण है। उस काल में हिंदी तथा भारतीय भाषाओं की पत्रकारिता ने राष्ट्रीय चेतना जगाने व मानस को तैयार करने में अहम भूमिका निभाई। ‘गांधी और पर्यावरण’ विषय पर महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के सहायक संपादक डॉ. अमित विश्वास ने पर्यावरण के प्रति गांधी की दृष्टि तथा वर्तमान समय में पर्यावरण के संकट व समाधान पर चर्चा की। हिंदी विवि के चीनी भाषा के सहायक प्रोफेसर डॉ. अनिर्वाण घोष ने ‘खादी प्रतिष्ठान सोदपुर एवं महात्मा गांधी’ विषय पर बोलते हुए 1939 में गांधी, नेहरू व सुभाष चंद्र बोस की सोदपुर में हुई बैठक को लेकर महत्वपूर्ण तथ्यों को प्रतिपादित किया। ‘युवाओं पर सोशल मीडिया का प्रभाव’ विषय पर रायपुर के जनसंचार विशेषज्ञ डॉ. शाहिद अली ने कहा कि सोशल मीडिया के द्वारा अपसंस्कृति का प्रचार रोकने के लिए युवाओं को जागरूक करने की आवश्यकता जताते हुए स्वस्थ व जागरूक समाज बनाने में सोशल मीडिया व तकनीकी का इस्तेमाल करने पर बल दिया। उन्होंने सोशल मीडिया के लिए कंटेंट लेखक व रोज़गार के अनेक अवसर उपलब्ध होने की बात कही। संगोष्ठी का समापन इंडो किड्स इंग्लिश स्कूल, कबनूर, कोल्हापुर के निदेशक एन. एन. काज़ी की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में महात्मा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान, सेवाग्राम के पूर्व अधिष्ठाता डॉ. ओमप्रकाश गुप्ता, आईएसएमपी के चेयरमैन चंद्रशेखर, लखनऊ, आईएसएमपी प्रोविंशियल गवर्निंग बॉडी कार्यकारी परिषद्, महाराष्‍ट्र के चेयरमैन कौशल मिश्र उपस्थित रहे। समापन समारोह में संगोष्ठी में शामिल प्रतिनिधियों को प्रणाम पत्र प्रदान किए गए।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. निलिमा मुणोत ने किया व एड. ताम्रध्‍वज बोरकर ने आभार माना। इस दौरान विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभागी, गणमान्य नागरिक व विद्यार्थियों की उपस्थिति रही।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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