बिलासपुर। शेयर मार्केट में निवेश पर मोटा मुनाफा दिलाने का लालच देकर जालसाजों ने उसलापुर निवासी वन विभाग के एक दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी से आठ लाख 83 हजार रुपये की ठगी कर ली। ठगों ने पहले विश्वास जीतने के लिए 800 रुपये का मुनाफा दिलाया, इसके बाद धीरे-धीरे बड़ी रकम ऐंठ ली। पीड़ित की शिकायत पर सकरी पुलिस ने अपराध दर्ज कर मामले को जांच में लिया है।

उसलापुर स्थित साईं आनंदम के पास रहने वाले आकाश जायसवाल (35) वन विभाग में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी हैं। पीड़ित ने पुलिस को बताया कि 31 दिसंबर को उनके मोबाइल फोन पर टेलीग्राम एप के माध्यम से एक मैसेज आया था। मैसेज में शेयर मार्केट में निवेश कर कम समय में मोटा मुनाफा कमाने का दावा किया गया था। आकर्षक प्रपोजल और आसान मुनाफे के लालच में आकर उन्होंने दो हजार रुपये का निवेश कर दिया। इसके अगले ही दिन जालसाजों ने उन्हें 800 रुपये का मुनाफा होने की जानकारी दी। एक ही दिन में 800 रुपये का फायदा मिलने से आकाश को योजना पर भरोसा हो गया और वे जालसाजों के झांसे में आ गए। इसके बाद जब उन्होंने अधिक राशि निवेश की, तो ठगों ने तकनीकी कारणों का हवाला देकर रकम फंस जाने की बात कही। रुपये वापस निकालने की बात कहने पर जालसाजों ने टैक्स, प्रोसेसिंग फीस और अन्य चार्जेस के नाम पर और रकम की मांग शुरू कर दी। उनके झांसे में आकर आकाश जायसवाल ने अलग-अलग किस्तों में कुल आठ लाख 83 हजार रुपये ठगों द्वारा बताए गए बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए। इसके बावजूद न तो उन्हें मुनाफा मिला और न ही उनकी मूल राशि वापस की गई। लगातार नौ दिनों तक रुपये लेने के बाद जालसाजों ने उनसे संपर्क करना बंद कर दिया। जब टेलीग्राम और मोबाइल नंबर बंद मिले, तब जाकर पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने सकरी थाने पहुंचकर पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई।
लोन लेकर दिए रुपये
पीड़ित ने पुलिस को बताया कि पहले तो उन्होंने अपनी जमा पूंजी जालसाजों को दे दी। इसके बाद मुनाफे की उम्मीद में उन्होंने लोन लेकर भी रकम ट्रांसफर की। अब न सिर्फ उनकी जमा पूंजी खत्म हो गई है, बल्कि वे भारी कर्ज के बोझ तले भी दब गए हैं। सकरी पुलिस ने अज्ञात जालसाजों के खिलाफ धोखाधड़ी का अपराध दर्ज कर बैंक खातों और ऑनलाइन लेनदेन की जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया और मैसेजिंग एप के जरिए मिलने वाले निवेश प्रस्तावों से सावधान रहें और बिना जांच-पड़ताल के किसी को भी रुपये न भेजें।
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