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January 12, 2026 10:13 pm

स्वामी विवेकानंद ने भारतीय साधना को विश्व के समक्ष प्रस्तुत किया : प्रो. रामेश्वर मिश्र

वर्धा, 12 जनवरी 2026।महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर सोमवार को ‘स्वामी विवेकानंद का जीवन एवं उनके विचार’ विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विश्वभारती विश्वविद्यालय, शांतिनिकेतन के सेवानिवृत्त प्रोफेसर प्रो. रामेश्वर मिश्र ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने भारतीय साधना और दार्शनिक परंपरा को विश्व मंच पर प्रतिष्ठित किया। उन्होंने भारत की दार्शनिक चेतना और सामाजिक पृष्ठभूमि से विदेशी जगत को परिचित कराया।

प्रो. मिश्र ने कहा कि स्वामी विवेकानंद युवाओं में दृढ़ मन और सुदृढ़ शरीर का निर्माण देखना चाहते थे। उन्होंने युवाओं को ‘उठो और जागो’ का संदेश देकर आत्मजागरण का आह्वान किया। अपने ऑनलाइन व्याख्यान में उन्होंने प्राचीन, मध्यकालीन और आधुनिक भारत की विवेचना करते हुए स्वामी विवेकानंद के विचार-दर्शन को रेखांकित किया।

उन्होंने शिकागो धर्म संसद में स्वामी विवेकानंद के ऐतिहासिक संबोधन का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘भाइयों और बहनों’ से आरंभ हुआ उनका वक्तव्य पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना। वेदांत और उपनिषद की धाराओं को विश्व तक पहुँचाने में उनकी भूमिका उल्लेखनीय रही। रामकृष्ण मिशन की स्थापना कर उन्होंने देश-विदेश में भारतीय आध्यात्मिक परंपरा का प्रचार-प्रसार किया।

प्रो. मिश्र ने विवेकानंद के धर्मविषयक चिंतन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अद्वैत वेदांत के अनुसार जीव और ईश्वर में कोई भेद नहीं है। वेदांत का जैसा व्यावहारिक उपयोग स्वामी विवेकानंद ने किया, वैसा अन्य किसी ने नहीं किया। उनका चिंतन आज के युवाओं के लिए मार्गदर्शक सिद्ध हो सकता है।

कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए बौद्ध अध्ययन विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. कृष्ण चंद पाण्डेय ने कहा कि रामकृष्ण परमहंस के विचारों को स्वामी विवेकानंद ने जन-जन तक पहुँचाया। उन्होंने स्वामी विवेकानंद, रामकृष्ण परमहंस, अद्वैत वेदांत और आर्य समाज की परंपरा पर विस्तार से चर्चा की।

साहित्य विद्यापीठ के अधिष्ठाता प्रो. अवधेश कुमार ने कहा कि स्वामी विवेकानंद धर्म को जीवन का पर्याय मानते थे तथा चरित्रवान और श्रद्धावान मनुष्य के निर्माण पर विशेष बल देते थे।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रशासनिक भवन परिसर में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुआ। वहीं दूर शिक्षा निदेशालय में पं. मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर भी माल्यार्पण किया गया। इस अवसर पर कुलसचिव कादर नवाज खान, परीक्षा नियंत्रक डॉ. सुरेन्द्र गादेवार सहित अनेक शिक्षक एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

महादेवी वर्मा सभागार में आयोजित इस विशेष व्याख्यान में बड़ी संख्या में शोधार्थी एवं विद्यार्थियों की सहभागिता रही। कार्यक्रम का प्रारंभ कुलगीत तथा समापन राष्ट्रगान से हुआ।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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