Explore

Search

October 9, 2026 9:52 am

कानाफूसी

क्या मैं ही सबकुछ बताऊं?

सरगुजा की खस्ताहाल सड़कों को देखकर जब सूबे के डिप्टी सीएम का पारा सातवें आसमान पर पहुंचा, तो उन्होंने कुछ इसी अंदाज में अफसरों की लंका लगा दी। मामला तब गरमाया जब नेताजी सीधे सड़कों के औचक निरीक्षण पर निकल पड़े। पुल-पुलिया की स्थिति और कामकाज में बरती जा रही लापरवाही से गुस्सा फूट पड़ा।  सड़क पर ही ऑन-द-स्पॉट अफसरों की ‘क्लास’ शुरू कर दी। फाइलें दबाए खड़े इंजीनियरों और अफसरों को देखकर उन्होंने तंज कसा, “साहब, ये गड्ढों में सड़क है या सड़क में गड्ढा? क्या अब यह भी मैं ही आकर बताऊं कि सड़कें कैसे बनती और बनाई जाती है।

डिप्टी सीएम का आक्रामक तेवर देखकर वहां मौजूद अफसरों के पसीने छूट गए। डिप्टी सीएम ने साफ कर दिया कि कागजी मरम्मत का खेल अब नहीं चलेगा। अब देखना यह है कि इस कड़क क्लास के बाद सरगुजा की सड़कों की किस्मत बदलती है या अफसर फिर से कोई नया बहाना ढूंढ लाते हैं!

सेवा संकल्प’ की अनोखी पाठशाला: जहां पढ़ाई छूटी, पर भीड़ जुटाने की कला सीखी

लीजिए साहब! हमारे नौनिहालों को किताबों के बोझ से मुक्ति दिलाने का एक और शानदार ‘सेवा संकल्प’ पूरा हुआ। हुआ यूं कि स्टेडियम में कोई बड़ा आयोजन था। अब ‘संकल्प’ भारी था, तो भारी भीड़ भी चाहिए थी। कतारों में चलते ये बच्चे उस दिन गणित या विज्ञान का फॉर्मूला नहीं, बल्कि ‘भीड़ तंत्र’ का व्यावहारिक ज्ञान सीख रहे थे। मास्टर साहब ने भी राहत की सांस ली, चलो, आज न कॉपी जांचने का झंझट, न हाजिरी का लफड़ा। सीधे स्टेडियम चलो, ‘सेवा’ में ही तो मेवा है। देश का भविष्य धूप में पसीना बहाकर नेताओं के संकल्प को मजबूत कर रहा था। नेता जी भी गदगद थे कि चलो, मुफ्त में ही सही, उनके भाषण को सुनने वाले ‘अनुशासित श्रोता’ तो मिले!

वाह री व्यवस्था! बच्चों को ‘देश का भविष्य’ कहते-कहते कब उन्हें स्टेडियम की कुर्सियां भरने वाला ‘फ्री का क्राउड’ बना दिया गया, पता ही नहीं चला। 

स्टेडियम सजा था और मौका था विशुद्ध ‘सरकारी’ कार्यक्रम का

नेताजी समर्थकों के साथ पहुंचे तो सही, पर चेहरे पर वो चिर-परिचित ‘सत्ताधारी’ रौब गायब था। वजह साफ थी, कार्यक्रम सरकारी था, इसलिए प्रोटोकॉल के तहत मौजूदगी भी जरुरती थी। अब राजनीति में मजबूरी ऐसी कि न उगलते बने, न निगलते बने। नेताजी का हाथ जनता की तरफ तो उठा, पर उनके हाथ की हरकत में वह जोश नहीं था, जो अमूमन अपने खुद के कार्यक्रम में नजर आता है। में दिखता है।

रही-सही कसर कार्यकर्ताओं की अजीब सी बेचैनी ने पूरी कर दी। सरकारी अफसरों की मुस्तैदी और प्रोटोकॉल के सख्त पहरे के बीच अनमने से बैठे रहे और किसी तरह कार्यक्रम खत्म होने का इंतजार करते रहे। कोई ‘गुटीय राजनीति’ का तीर न चल जाए, इस डर से मौके से नदारद होने की बजाय अपनी मौजूदगी दिखाते रहे। अब ये तो समर्थक ही अच्छी तरह जान और समझ सकते हैं, मौजूदा दौर में क्या कुछ घट रहा है और क्या कुछ घटने वाला है। इसी घटत-बढ़त के बीच कार्यक्रम निपटाए और अपनी राह पकड़ चलते बने।

खस्ताहाल सड़कों पर मनेगी नवरात्रि, ये कैसी व्यवस्था

इस बार न्यायधानी समेत पूरे प्रदेश में नवरात्रि का त्योहार श्रद्धालुओं को उबड़-खाबड़ सड़कों के बीच मनाना पड़ेगा। सरकार और प्रशासन ने भक्तों के लिए सड़कों पर पहले से ही ऐसे ‘गड्ढा रूपी’ स्पीड ब्रेकर तैयार कर दिए हैं, जिन्हें देखकर लगता है कि मां दुर्गा के दर्शन से पहले ही भक्तों की कड़ी परीक्षा लेने की पूरी तैयारी है।

वैसे, इन सड़कों के भी अपने फायदे हैं। माता के जगराते में जाने वालों को नींद आने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता, क्योंकि गाड़ी जैसे ही चलती है, ‘कत्थक’ और ‘भांगड़ा’ अपने आप होने लगता है। लोग कह रहे हैं कि इस बार डांडिया खेलने के लिए किसी विशेष पास की जरूरत नहीं पड़ेगी; आप बस अपनी बाइक उठाइए और न्यायधानी की मुख्य सड़क पर निकल जाइए। गड्ढों से बचने की जद्दोजहद में आपकी कमर और हाथ-पैर इस कदर हिलेंगे कि बिना डांडिया स्टिक के ही डांडिया का पूरा फील आ जाएगा।

प्रशासन की इस ‘अद्भुत’ व्यवस्था को देखकर तो यही लगता है कि श्रद्धा अपनी जगह है और गड्ढे अपनी जगह। अब जब नवरात्रि सिर पर है, तो तय मानिए कि इसी ‘एडवेंचर ट्रैक’ से काम चलाना पड़ेगा। 

अटकलबाजी

स्व बीआर साव बहतराई स्टेडियम में भीड़ बढ़ाने के लिए स्कूली बच्चों को ले जाने का टिप्स किसने दिया था?

डिप्टी सीएम के सरगुजा दौरा के क्या राजनीतिक मायने हैं? तेवर बदले-बदले क्यों नजर आए?

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

Advertisement Carousel
CRIME NEWS

BILASPUR NEWS