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October 8, 2026 12:56 pm

पीकिंग विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में डॉ. अनिर्बाण घोष ने पढ़ा शोध पत्र

भारत-चीन के भाषाई एवं सांस्कृतिक अध्ययन पर दुनिया भर के विशेषज्ञों ने किया मंथन

CBN36 वर्धा, 8 अक्टूबर। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के भाषा विद्यापीठ के अंग्रेजी एवं विदेशी भाषा अध्ययन विभाग के सहायक आचार्य डॉ. अनिर्बाण घोष ने चीन के प्रतिष्ठित पीकिंग विश्वविद्यालय में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में शोध पत्र प्रस्तुत किया। 19 और 20 सितंबर को आयोजित इस संगोष्ठी में भारत समेत विभिन्न देशों के विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों से जुड़े करीब 70 विशेषज्ञों एवं शोधकर्ताओं ने भाग लिया।

पीकिंग विश्वविद्यालय के पूर्वी साहित्य अनुसंधान केंद्र और विदेशी भाषा विद्यापीठ के प्राच्य अध्ययन विभाग की स्थापना के 80 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित संगोष्ठी में डॉ. घोष ने ‘चीन में भारतीय भाषाओं का अध्ययन : पीकिंग विश्वविद्यालय के प्राच्य अध्ययन विभाग की स्थापना में चीनी और भारतीय विद्वानों का योगदान’ विषय पर शोध पत्र प्रस्तुत किया।

संगोष्ठी में भारत के महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के अलावा ब्रिटेन के ऑक्सफोर्ड और एडिनबर्ग विश्वविद्यालय, अमेरिका के न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय, फिलीपींस के मनीला विश्वविद्यालय, जर्मनी के बॉन विश्वविद्यालय, दक्षिण कोरिया के सियोल स्थित विश्वविद्यालय, मंगोलिया राष्ट्रीय विश्वविद्यालय, वियतनाम के चियांग माई विश्वविद्यालय तथा चीन के 20 से अधिक विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञ शामिल हुए।

चीन में भारत अध्ययन की परंपरा पर चर्चा

संगोष्ठी में एशिया और विश्व में प्राच्य विद्या के इतिहास, वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। विद्वानों ने चीन में भारत अध्ययन की लगभग एक सदी पुरानी परंपरा और वर्तमान समय में इसकी प्रासंगिकता पर भी विचार रखे। बताया गया कि चीन में भारत अध्ययन की औपचारिक शुरुआत लगभग 100 वर्ष पहले पीकिंग विश्वविद्यालय से हुई थी।

कार्यक्रम में पीकिंग विश्वविद्यालय के अलावा चिंगहुआ, रेनमिन, बीजिंग फॉरेन स्टडीज विश्वविद्यालय तथा शंघाई, चोंगकिंग, निंगश्या और वुहान सहित विभिन्न क्षेत्रों के विश्वविद्यालयों एवं शोध संस्थानों के विशेषज्ञों ने सहभागिता की।

डॉ. घोष की इस अंतरराष्ट्रीय अकादमिक सहभागिता को विश्वविद्यालय की वैश्विक शैक्षणिक उपस्थिति और भारत-चीन के भाषाई एवं सांस्कृतिक अध्ययन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने डॉ. अनिर्बाण घोष को बधाई देते हुए इसे विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय पहचान को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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