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October 7, 2026 6:31 pm

CBI के छह अधिकारियों पर कोर्ट में गलत तथ्य पेश करने के आरोप की जांच होगी, दिल्ली हाईकोर्ट ने शिकायत दर्ज करने का दिया आदेश

ड्राफ्ट में पहले लिखा था- DoPT ने SLP का प्रस्ताव ठुकराया; बाद में जोड़ा गया- मंत्रालय से पत्राचार जारी है

अशोक कुमार अग्रवाल की अपील मंजूर, विशेष अदालत का आदेश रद्द; चार सप्ताह में मजिस्ट्रेट को शिकायत भेजने के निर्देश

CBN36 नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने अदालत में सीबीआई की ओर से दाखिल जवाब में कथित तौर पर गलत तथ्य प्रस्तुत किए जाने के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए छह अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज करने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति मधु जैन की पीठ ने अशोक कुमार अग्रवाल की आपराधिक अपील स्वीकार करते हुए विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट), सीबीआई-02, राउज एवेन्यू कोर्ट का 25 अक्टूबर 2025 का आदेश रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने संबंधित विशेष न्यायाधीश को छह अधिकारियों के खिलाफ शिकायत तैयार कर चार सप्ताह के भीतर सक्षम मजिस्ट्रेट को भेजने का निर्देश दिया है।

मामला वर्ष 2016 में सीबीआई की ओर से अदालत में दाखिल एक जवाब से जुड़ा है। अशोक कुमार अग्रवाल के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में जांच के दौरान दस्तावेज जब्त किए गए थे। हाईकोर्ट द्वारा अभियोजन की स्वीकृति को अमान्य ठहराए जाने और विशेष अदालत से आरोपमुक्त होने के बाद अग्रवाल ने जब्त दस्तावेज वापस लेने के लिए आवेदन किया था।

इस आवेदन के जवाब में सीबीआई ने 2 अगस्त 2016 को अदालत में कहा था कि आगे की कानूनी कार्रवाई को लेकर प्रशासनिक मंत्रालय के साथ पत्राचार चल रहा है और इसलिए दस्तावेज लौटाना उचित नहीं होगा। बाद में इसी कथन को लेकर सवाल उठा कि क्या उस समय वास्तव में मंत्रालय के साथ कोई पत्राचार चल रहा था।

ड्राफ्ट में था अलग तथ्य, बाद में बदला गया

हाईकोर्ट ने सीबीआई की प्रशासनिक फाइलों, अलग-अलग ड्राफ्ट और फाइल नोटिंग की जांच की। अदालत ने पाया कि दूसरे ड्राफ्ट में स्पष्ट रूप से लिखा था कि DoPT ने CBI के SLP दाखिल करने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। बाद में इस तथ्य को हटाकर हाथ से यह कथन जोड़ा गया कि प्रशासनिक मंत्रालय के साथ आगे की कानूनी कार्रवाई के संबंध में पत्राचार चल रहा है।

अदालत के अनुसार, 2 अगस्त 2016 को सीबीआई और DoPT के बीच कोई पत्राचार चल नहीं रहा था। उस समय सीबीआई के भीतर प्रस्ताव पर पुनर्विचार और वरिष्ठ कानून अधिकारियों से आगे राय लेने की प्रक्रिया चल रही थी। हाईकोर्ट ने कहा कि आंतरिक स्तर पर किसी प्रस्ताव पर विचार होना और किसी बाहरी मंत्रालय के साथ पत्राचार चलना एक समान नहीं माना जा सकता।

छह अधिकारियों की भूमिका रिकॉर्ड में सामने आई

हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड के आधार पर कहा कि सुषिल दीवान ने अलग-अलग ड्राफ्ट तैयार किए, हस्तलिखित बदलावों को अंतिम ड्राफ्ट में शामिल किया और जवाब अदालत में अपने हस्ताक्षर से दाखिल किया। विनीत विनायक की भूमिका हस्तलिखित बदलाव और अंतिम जवाब की स्वीकृति से प्रथमदृष्टया जुड़ी पाई गई।

इसके अलावा प्रेम कुमार गौतम, अमित कुमार, एमडी आजाद और रमन त्यागी की भूमिका भी जवाब को तैयार करने, जांचने, आगे भेजने और स्वीकृति की प्रक्रिया में सामने आई। अदालत ने माना कि संबंधित अधिकारियों की भूमिका और ज्ञान के अलग-अलग स्तर हो सकते हैं, लेकिन इस स्तर पर किसी को शिकायत की प्रक्रिया से बाहर करना उचित नहीं होगा।

बाद में दिया गया जवाब भी नहीं बना बचाव

सीबीआई ने 9 अगस्त 2016 को अतिरिक्त जवाब दाखिल कर कहा था कि उसने सिद्धांततः आगे चुनौती देने का निर्णय लिया है और प्रस्ताव DoPT को भेजने की प्रक्रिया में है। हाईकोर्ट ने माना कि इस अतिरिक्त जवाब को पहले जवाब के साथ पढ़ना जरूरी है, लेकिन इससे 2 अगस्त को किए गए कथन की विसंगति खत्म नहीं होती।

अदालत ने विशेष रूप से कहा कि 8 अगस्त 2016 को प्रस्ताव DoPT को भेजा गया था, जबकि विवादित जवाब 2 अगस्त को दाखिल हो चुका था। इसलिए उस तारीख को मंत्रालय से पत्राचार जारी होने का दावा रिकॉर्ड से मेल नहीं खाता था।

‘नुकसान नहीं हुआ’ तर्क भी नहीं माना

विशेष अदालत ने पहले इस आधार पर शिकायत की कार्रवाई से इनकार किया था कि अग्रवाल का दस्तावेज वापस लेने का आवेदन प्रारंभ में मंजूर हो गया था और बाद में सीबीआई ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया था। लेकिन हाईकोर्ट ने कहा कि धारा 340 के तहत कार्रवाई का सवाल केवल किसी व्यक्ति को हुए नुकसान से तय नहीं होता। यह भी देखना जरूरी है कि कथित गलत तथ्य न्याय प्रशासन को प्रभावित करने की क्षमता रखते थे या नहीं।

हाईकोर्ट ने माना कि संबंधित कथन उस आवेदन से जुड़ा था जिसमें जब्त दस्तावेज वापस नहीं करने का आधार दिया गया था। इसलिए यह न्यायालय के समक्ष चल रही कार्यवाही में महत्वपूर्ण तथ्य था और न्यायिक निर्णय को प्रभावित करने की क्षमता रखता था।

इन छह अधिकारियों के खिलाफ होगी शिकायत

हाईकोर्ट ने विशेष न्यायाधीश को निम्न अधिकारियों के खिलाफ लिखित शिकायत करने का निर्देश दिया है-

  • सुषिल दीवान
  • विनीत विनायक
  • अमित कुमार
  • रमन त्यागी
  • प्रेम कुमार गौतम
  • एमडी आजाद

शिकायत भारतीय दंड संहिता की धारा 191 सहपठित धारा 193 और धारा 209 के तहत कथित अपराधों को लेकर होगी। विशेष न्यायाधीश को इसे आदेश की प्रति प्राप्त होने के चार सप्ताह के भीतर संबंधित मजिस्ट्रेट को भेजना होगा।

दोष सिद्ध नहीं, अब मजिस्ट्रेट के समक्ष होगी आगे की कार्रवाई

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि उसका फैसला इस स्तर पर संबंधित अधिकारियों को दोषी ठहराने वाला नहीं है। अदालत ने केवल प्रथमदृष्टया उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर शिकायत दर्ज करने और मामले को सक्षम मजिस्ट्रेट के समक्ष आगे बढ़ाने का निर्देश दिया है। संबंधित अदालत आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर स्वतंत्र रूप से आगे की कार्रवाई करेगी।

फैसले का सार: दिल्ली हाईकोर्ट ने 25 अक्टूबर 2025 के विशेष अदालत के आदेश को रद्द कर अशोक कुमार अग्रवाल की अपील मंजूर की और कहा कि उपलब्ध दस्तावेजी रिकॉर्ड शिकायत दर्ज कर जांच आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त प्रथमदृष्टया आधार प्रदान करता है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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