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October 2, 2026 8:06 pm

बिहान के सहारे गीता ने लिखी आत्मनिर्भरता की कहानी

80 डिसमिल जमीन में सब्जी की खेती और बकरी पालन से सालाना बढ़ी आमदनी, अन्य महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा

CBN36 छत्तीसगढ़ सारंगढ़। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़कर सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम जेवरा की श्रीमती गीता मिरी ने मेहनत और सूझबूझ से अपनी आजीविका को मजबूत किया है। कभी सीमित आय के बीच परिवार की जिम्मेदारियां संभालने वाली गीता अब सब्जी उत्पादन और बकरी पालन के जरिए आत्मनिर्भरता की मिसाल बन रही हैं।

बिहान से जुड़ने के बाद स्व-सहायता समूह के माध्यम से उन्हें 50 हजार रुपये का उद्यमी ऋण मिला। गीता ने इस राशि का उपयोग अपनी 80 डिसमिल जमीन में आजीविका का साधन विकसित करने में किया। उन्होंने खेत में टमाटर, खीरा और करेला जैसी सब्जियों की खेती शुरू की।

उन्नत तकनीक, मेहनत और बाजार की मांग का लाभ गीता को मिला। सब्जी उत्पादन से उन्हें प्रतिदिन करीब तीन से चार हजार रुपये तक की आमदनी होने लगी। अब तक वे सब्जी उत्पादन से करीब दो लाख रुपये की आय अर्जित कर चुकी हैं। एक फसल चक्र में ही उन्हें लगभग 60 हजार रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ।

बकरी पालन से बढ़ी आमदनी

सब्जी खेती में सफलता के बाद गीता ने अपनी आय के स्रोत को और बढ़ाने के लिए बकरी पालन भी शुरू किया। इससे उन्हें प्रतिवर्ष करीब 50 हजार रुपये की अतिरिक्त आय होने लगी। खेती और पशुपालन को साथ लेकर चलने से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई और गीता का आत्मविश्वास भी बढ़ा।

गीता का कहना है कि बिहान योजना और स्व-सहायता समूह से मिले सहयोग ने उन्हें आर्थिक रूप से आगे बढ़ने का अवसर दिया। अपनी मेहनत से परिवार की आय में योगदान देना उनके लिए गर्व की बात है।

ग्राम जेवरा की गीता मिरी की कहानी यह दिखाती है कि सरकारी योजनाओं का सही उपयोग, मेहनत और आत्मविश्वास मिलकर ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की राह खोल सकते हैं। उनकी सफलता आसपास की महिलाओं को भी स्वरोजगार और आजीविका के नए साधन अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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