यूथ कांग्रेस चुनाव,किस करवट बैठेगा ऊंट
यूथ कांग्रेस चुनाव की प्रक्रिया पूरी हो गई है। ऑनलाइन वोटिंग तो खत्म हो गई है पर सस्पेंस अब भी बाकी है। कौन किस पर भारी पड़ा या फिर आने वाले दिनों में जब ऑनलाइन वोटिंग का पिटारा खुलेगा तब पता चलेगा, इस महा चुनाव अभियान में कौन किस पर भारी पड़ गया है। बहरहाल दोनों ही गुट के सिपहसालार अपने-अपने दावे कर रहे हैं। दावों का क्या, इन दावों की हकीकत दो महीने बाद पता चलेगी। तब तो मुंगेरीलाल के हसीन सपने तो देख ही सकते हैं। पार्टी हो रही सो अलग। पार्टी के लिए बहाने चाहिए। बहाना तो सामने है। चुनाव हो गया तो अब थकान मिटाने के लिए ही सही, पार्टी तो बनती है। बहरहाल दोनों की गुटों के बीच पार्टी का दौर चल रहा है। दो महीने बाद एक और दौर चलेगा। उसमें भी दोनों गुटों की ओर से यह सब दोहराए जाएंगे। जीतने वाले जश्न की और हारने वाले गम की, पार्टी तो पार्टी है, नजरिया बस बदलता है।
दोस्त, दोस्त ना रहा और दुश्मन की बात छोड़िए
यूथ कांग्रेस चुनाव ने जिले के बड़े नेताओं का भ्रम तोड़ दिया है। उस जमाने को याद करिए जब छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार हुआ करती थी और दाऊजी सीएम की कुर्सी पर काबिज थे। अब ये तो नहीं बताना पड़ेगा, तब बिलासपुर जिले में किसका दबदबा चलता था और तूती बोलती थी। तब छत्तीसगढ़ भवन के सामने और आसपास छोटे से लेकर बड़े नताओं का जमावड़ा लगा रहता था। इसमें हाजिरी देने वालों की भी कमी नहीं रहती थी। सरकंडा कहें या फिर मंगला, जिलेभर से कार्यकर्ता से लेकर नेता आते जाते रहते थे। समय बदला तो राजनीतिक प्रतिबद्धता भी बदल गई। आसपास मंडराने वाले और पिछलग्गू अब नेता बन गए। यूथ कांग्रेस चुनाव में तो यही देखने को मिला। अब ये पता लगाने का काम आपका है, तब कौन पिछलग्गू हुआ करता था और आज भिलाई वाले नेताजी के दाएं बाएं बन गए।
भाजपा में बड़ा रिफार्म, कांग्रेस में रिपिटिशन पालिटिक्स
सत्ताधारी दल भाजपा ने संगठन में बड़ा और व्यापक स्तर पर बदलाव कर दिया है। प्रदेश प्रभारी से लेकर संगठन महामंत्री के चेहरे बदल दिए। इस रिफार्म का असर निश्चित रूप से आने वाले दिनों में दिखाई देगा। प्रदेश प्रभारी से लेकर नए संगठन महामंत्री का जब छत्तीसगढ़ दौरा होगा तब यह सब नजर आने लगेगा। बहरहाल भाजपा ने तो विधानसभा चुनाव से पहले अपनी मंशा जाहिर कर दी है। विपक्षी दल की ओर नजर दौड़ाते हैं, सह प्रभारी जांगिड़ ने तो अटकलबाजी पर पूर्ण विराम लगा दिया है, कांग्रेस की राजनीति में यह भी सच है, कब क्या हो जाए। लोग तो यह भी कहने लगे हैं, जांगिड़ के बयान का क्या, दिल्ली का मूड बदला और इधर कुर्सी बदल जाएगी। अटकलबाजी का दौर चल रहा है। अटकलों के बीच नाम को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। चलिए आपको कुछ पता चला तो हमें भी बताइएगा।
संगठन के बाद कहीं सत्ता की बारी तो नहीं
सत्ताधारी दल ने संगठन में बड़ा रिफार्म कर दिया है, संगठन में बड़े बदलाव के बाद अब इस बात की चर्चा जोर पकड़ने लगी है, मंत्रिमंडल में भी तो इसी अंदाज में बदलाव देखने को मिलेगा। बदलाव के बाद मंत्रियों की छुट्टियों को लेकर भी चर्चा होने लगी है, सत्ता से लेकर संगठन के बीच हलचल मची हुई है। जिन मंत्रियों की विदाई होने वाली है और जिनको असवर मिलने वाला है, इन सभी को लेकर संभावनाएं और अटकलबाजी का दौर जारी है। यह दौर चलते ही रहेगा। संभावनाओं के बीच दावेदार भी अपनी संभावनाएं तलाशने लगे हैं। पता ही मौजूदा दौर में किसका भाग्य साथ दे तो कुर्सी मिल जाए।
अटकलबाजी
यूथ कांग्रेस चुनाव ने जिले के दिग्गज नेताओं को क्या सबक सिखाया, पिछलग्गुओं की बिसात को लेकर अब क्या चर्चा हो रही है, कौन-कौन हैं जिन्होंने अपनी दिखा ही दी।
मंत्रिमंडल रिसफल के बीच जिले के किन दिग्गजों की चर्चा एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। पावर घटाने की बात भी हो रही है। जरा पता करिए किसे मिलेगी कुर्सी और किनका पावर होगा कम।
प्रधान संपादक




