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September 30, 2026 5:56 pm

सामूहिक दुष्कर्म मामले में छह दोषी, दो को उम्रकैद और चार को 20-20 साल की सजा

“एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कहा कि महिला और कमजोर वर्ग के खिलाफ होने वाले गंभीर अपराधों में पुलिस संवेदनशीलता और पूरी गंभीरता से कार्रवाई करती है। ऐसे मामलों में साक्ष्य आधारित विवेचना, आरोपियों की त्वरित गिरफ्तारी और न्यायालय में प्रभावी अभियोजन सुनिश्चित करना पुलिस की प्राथमिकता है”

CBN36 रायगढ़। पुसौर थाना क्षेत्र में वर्ष 2024 में महिला से हुए सामूहिक दुष्कर्म के मामले में विशेष न्यायालय (एट्रोसिटी एक्ट), रायगढ़ ने छह आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। न्यायालय ने दो आरोपियों को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(2)(v) के तहत आजीवन कारावास तथा चार आरोपियों को सामूहिक दुष्कर्म और विधि विरुद्ध जमाव की धाराओं में 20-20 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई।

न्यायालय ने यह फैसला 28 सितंबर 2026 को सुनाया। पुलिस के अनुसार, मामले की विवेचना तत्कालीन CSP आकाश शुक्ला और अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक राजीव बेरीवाल की प्रभावी पैरवी के चलते आरोपियों के खिलाफ दोषसिद्धि हुई। वर्तमान एसएसपी शशि मोहन सिंह के मार्गदर्शन में मामले से जुड़े साक्षियों की समय पर न्यायालय में उपस्थिति भी सुनिश्चित कराई गई।

मेला देखने जा रही थी महिला, तालाब की ओर ले गए

पुलिस के मुताबिक, 19 अगस्त 2024 की शाम पीड़िता अकेले पैदल मेला देखने जा रही थी। इसी दौरान मुख्य मार्ग पर उसकी मुलाकात पूर्व परिचित आरोपी कृष्णा उर्फ राहुल चौहान और उसके साथियों से हुई। आरोप है कि आरोपी महिला को जबरन तालाब की ओर ले गए। वहां अन्य युवक भी पहुंच गए और आरोपियों ने बारी-बारी से उसके साथ दुष्कर्म किया।

घटना के बाद आरोपियों ने महिला को धमकाते हुए अपने साथ ले जाने का प्रयास किया। पीड़िता किसी तरह वहां से निकलकर गांव की महिलाओं के पास पहुंची और उन्हें घटना की जानकारी दी। बाद में सरपंच को सूचना दी गई और 20 अगस्त को पुसौर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई।

नौ आरोपियों की हुई पहचान

रिपोर्ट पर अपराध क्रमांक 194/2024 दर्ज कर भारतीय न्याय संहिता की धारा 70(1), 140(3) और 351(3) के तहत जांच शुरू की गई। पुलिस ने विवेचना के दौरान कुल नौ आरोपियों की पहचान की। इनमें से आठ को पकड़ा गया, जबकि दो आरोपी विधि से संघर्षरत बालक पाए गए। एक अन्य विधि से संघर्षरत बालक फरार था, जिसकी बाद में मृत्यु हो गई। उसे प्रकरण से पृथक कर दिया गया। दोनों बाल आरोपियों के खिलाफ अलग से किशोर न्यायालय में चालान पेश किया गया।

प्रकरण की प्रारंभिक विवेचना तत्कालीन पुसौर थाना प्रभारी निरीक्षक रोहित बंजारे ने की। इसके बाद तत्कालीन CSP रायगढ़ आकाश शुक्ला ने विवेचना आगे बढ़ाई। जांच के दौरान सच्चिदानंद साहू उर्फ मुन्नू और उत्तम मिरधा के खिलाफ एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की धाराएं 3(1)(s), 3(1)(r) और 3(2)(v) भी जोड़ी गईं।

इन आरोपियों को मिली सजा

  • सच्चिदानंद साहू उर्फ मुन्नू — आजीवन कारावास
  • उत्तम मिरधा — आजीवन कारावास
  • कृष्णा उर्फ राहुल चौहान — 20 वर्ष का कारावास
  • नरेन्द्र उर्फ छोटू सिदार — 20 वर्ष का कारावास
  • बबलू चौहान — 20 वर्ष का कारावास
  • राहुल खड़िया — 20 वर्ष का कारावास

न्यायालय ने पीड़िता को क्षतिपूर्ति योजना के तहत नियमानुसार प्रतिकर राशि दिए जाने की अनुशंसा भी की है।

एसएसपी बोले- गंभीर अपराधों में साक्ष्य आधारित कार्रवाई प्राथमिकता

एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कहा कि महिला और कमजोर वर्ग के खिलाफ होने वाले गंभीर अपराधों में पुलिस संवेदनशीलता और पूरी गंभीरता से कार्रवाई करती है। ऐसे मामलों में साक्ष्य आधारित विवेचना, आरोपियों की त्वरित गिरफ्तारी और न्यायालय में प्रभावी अभियोजन सुनिश्चित करना पुलिस की प्राथमिकता है। इस मामले में पुलिस की विवेचना और अभियोजन की प्रभावी पैरवी से आरोपियों को कठोर दंड मिलना पीड़िता को न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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