
हिंदी दिवस पखवाड़े के तहत केएमटी गर्ल्स कॉलेज में ‘हिंदी, चुनौतियां और संभावनाएं’ विषय पर संगोष्ठी
CBN36 रायगढ़। हिंदी दिवस पखवाड़े के अंतर्गत 24 सितंबर को के.एम.टी. शासकीय गर्ल्स कॉलेज, रायगढ़ में ‘हिंदी, चुनौतियां और संभावनाएं’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में आमंत्रित साहित्यकार रमेश शर्मा एवं बसंत राघव अतिथि के रूप में शामिल हुए। महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. उमा नेगी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।
कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए हिंदी के प्राध्यापक राजकुमार राठौर ने हिंदी की वर्तमान स्थिति, चुनौतियों और संभावनाओं पर विषय प्रवेश कराया। प्राचार्य डॉ. उमा नेगी ने अपने उद्बोधन में विद्यार्थियों और अतिथियों का उत्साहवर्धन किया।
संगोष्ठी के मुख्य वक्ता एवं सुप्रसिद्ध कहानीकार रमेश शर्मा ने हिंदी से जुड़ी प्रचलित धारणाओं पर चर्चा करते हुए कहा कि दुनिया की लगभग 800 करोड़ आबादी में करीब 61 करोड़ लोग हिंदी बोलते हैं। अंग्रेजी और मंदारिन के बाद हिंदी प्रमुख रूप से उपयोग की जाने वाली भाषाओं में शामिल है। भारत में मातृभाषा के रूप में हिंदी बोलने वालों की संख्या भी 43 करोड़ से अधिक है। ऐसे में हिंदी पर संकट की चर्चा से अधिक जरूरी उसके बदलते स्वरूप और संभावनाओं को समझना है।
उन्होंने विदेशों में हिंदी के विस्तार का उल्लेख करते हुए गिरमिटिया मजदूरों का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि 19वीं सदी में जब भारतीय मजदूरों को मॉरीशस, सूरीनाम, फिजी, त्रिनिदाद और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में ले जाया गया, तो वे अपने साथ रामचरितमानस और हनुमान चालीसा भी ले गए। दिनभर मेहनत के बाद चौपालों में धार्मिक ग्रंथों का पाठ उनके मनोरंजन और सांस्कृतिक जुड़ाव का माध्यम बनता था। इसी सांस्कृतिक विरासत के साथ विदेशों में हिंदी का विस्तार हुआ।
पॉप कल्चर से बदल रहा हिंदी का स्वरूप

रमेश शर्मा ने कहा कि आज हिंदी की दुनिया भी दो हिस्सों में दिखाई देती है। एक ओर वह हिंदी है, जिसे शुद्धतावादी दृष्टिकोण से साहित्य तक सीमित कर दिया गया है, वहीं दूसरी ओर ‘नई वाली हिंदी’ है, जिसका संबंध पॉप कल्चर से है। उन्होंने कहा कि हिंदी के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में भाषा को रोजगार और करियर से जोड़ने की सोच, अंग्रेजी के प्रति बढ़ता आकर्षण और बच्चों का अपनी मातृभाषा से दूर होना शामिल है।
उन्होंने कहा कि हिंदी को केवल साहित्य की भाषा तक सीमित करना उचित नहीं है। महात्मा गांधी भी प्राथमिक शिक्षा मातृभाषा में दिए जाने के पक्षधर थे। इसके साथ ही भारतीय भाषाओं के बीच आपसी खींचतान और गैर-हिंदी भाषी क्षेत्रों में हिंदी को लेकर विरोध भी भाषा के सामने चुनौती है।
उन्होंने मीडिया, सोशल मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर विकसित हो रही हिंदी का जिक्र करते हुए कहा कि पॉप कल्चर में हिंदी का स्वरूप कई स्तरों पर बदला है। ओटीटी में जहां कई बार हिंदी का प्रयोग गाली-गलौज की भाषा के रूप में होता है, वहीं टीवी डिबेट में यह आक्रामक भाषा के रूप में दिखाई देती है। ऐसे में हिंदी की जड़ों को सुरक्षित रखते हुए उसके बदलते स्वरूप के साथ समन्वय स्थापित करना जरूरी है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म से बढ़ीं संभावनाएं

हिंदी की संभावनाओं पर चर्चा करते हुए रमेश शर्मा ने कहा कि इंस्टाग्राम, फेसबुक, यूट्यूब और ओटीटी जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म ने हिंदी के लिए व्यापक अवसर पैदा किए हैं। युवा हिंदी को करियर के रूप में अपना रहे हैं और हिंदी संपर्क की भाषा के रूप में अपना सामाजिक आधार मजबूत कर रही है। मेडिकल और इंजीनियरिंग की शिक्षा में भी हिंदी के प्रयोग की दिशा में प्रयास शुरू हुए हैं। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकों में भी हिंदी के उपयोग की संभावनाएं तेजी से बढ़ रही हैं।
कार्यक्रम में आमंत्रित कवि एवं कहानीकार बसंत राघव ने विद्यार्थियों के समक्ष अपनी कविता का पाठ किया। उन्होंने आयोजन के लिए महाविद्यालय परिवार को बधाई दी। संगोष्ठी में महाविद्यालय के प्राध्यापक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।कार्यक्रम के अंत में सहायक प्राध्यापक देवांगन ने आभार व्यक्त किया। उनके धन्यवाद ज्ञापन के साथ संगोष्ठी का समापन हुआ।
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