सीआरएस निरीक्षण और गति परीक्षण पूरा, भिलाई इस्पात संयंत्र तक लौह अयस्क पहुंचाने में मिलेगी सुविधा
CBN36 रायपुर, 23 सितंबर। दक्षिण छत्तीसगढ़ के दूरस्थ क्षेत्रों को रेल नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में भारतीय रेलवे ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। दल्लीराजहरा-रावघाट नई रेल लाइन परियोजना के अंतिम चरण के 17.5 किलोमीटर लंबे ताड़ोकी-रावघाट खंड का निर्माण कार्य पूरा हो गया है। इस सिंगल लाइन विद्युतीकृत ब्रॉडगेज खंड का बुधवार को सीआरएस (कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी) निरीक्षण और गति परीक्षण किया गया।

सीआरएस निरीक्षण के दौरान रेल लाइन, पुल-पुलियों, विद्युतीकरण, सिग्नलिंग और अन्य सुरक्षा एवं तकनीकी व्यवस्थाओं की बारीकी से जांच की गई। रेल खंड की परिचालन क्षमता और सुरक्षा मानकों का भी परीक्षण किया गया। यह प्रक्रिया खंड में नियमित रेल परिचालन शुरू करने की दिशा में अहम चरण मानी जा रही है।
95 किमी लंबी परियोजना का हिस्सा है खंड
ताड़ोकी-रावघाट खंड 95 किलोमीटर लंबी दल्लीराजहरा-रावघाट नई रेल लाइन परियोजना का हिस्सा है। वर्तमान में दल्लीराजहरा से ताड़ोकी तक रेल सेवा उपलब्ध है। ताड़ोकी से रावघाट तक रेल पहुंचने के बाद दक्षिण छत्तीसगढ़ के दूरस्थ क्षेत्रों का रेल संपर्क और मजबूत होगा। इससे स्थानीय लोगों को आवागमन के लिए सुविधाजनक और बेहतर परिवहन सुविधा मिल सकेगी।
भिलाई इस्पात संयंत्र तक लौह अयस्क पहुंचाना होगा आसान
नई रेल लाइन का एक प्रमुख उद्देश्य भिलाई इस्पात संयंत्र तक लौह अयस्क के परिवहन को सुगम बनाना है। रेल संपर्क बढ़ने से लौह अयस्क की ढुलाई अधिक सुविधाजनक होगी और इससे इस्पात उद्योग को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा कृषि उत्पादों और स्थानीय स्तर पर उत्पादित वाणिज्यिक वस्तुओं के परिवहन में भी रेल लाइन उपयोगी साबित होगी।
रायपुर और भिलाई से जुड़ाव होगा मजबूत
रेल संपर्क मजबूत होने से क्षेत्र के लोगों की राज्य की राजधानी रायपुर और भिलाई से आवाजाही आसान होगी। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और व्यापार से जुड़े अवसरों तक पहुंच बढ़ेगी। दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों को राज्य के व्यापक रेल नेटवर्क से जोड़ने में भी यह परियोजना महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को भी मिलेगा बढ़ावा
रेल सुविधा के विस्तार से क्षेत्र में पर्यटन, निवेश और अन्य आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की संभावना है। बेहतर कनेक्टिविटी से स्थानीय व्यापार को बाजार तक पहुंच बनाने में सुविधा होगी और क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।
ताड़ोकी-रावघाट खंड का सीआरएस निरीक्षण और गति परीक्षण परियोजना को चालू करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इसके बाद निर्धारित प्रक्रियाएं पूरी होने पर इस खंड में रेल परिचालन शुरू करने का रास्ता साफ होगा।
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