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September 22, 2026 7:17 pm

शरीर को तपाए बिना आत्मा से कर्म हटाना कठिन : अकम्पमति माता

दशलक्षण महापर्व के सातवें दिन उत्तम तप धर्म की आराधना, तत्त्वार्थ सूत्र का वाचन और धार्मिक कार्यक्रम हुए

CBN36 बिलासपुर। दशलक्षण महापर्व के सातवें दिन मंगलवार को जैन समाज ने उत्तम तप धर्म की आराधना की। क्रांतिनगर स्थित श्री 1008 आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के आचार्य विद्यासागर सभागार में दिनभर धार्मिक आयोजन हुए। इस दौरान तत्त्वार्थ सूत्र का वाचन, अभिषेक-शांतिधारा और प्रवचन के साथ जैन दर्शन पर आधारित ‘द्वारिका दहन और कृष्ण का मरण’ नाटिका का मंचन किया गया।

तप से होती है आत्मशुद्धि

प्रवचन में पूज्य 105 अकम्पमति माताजी एवं अचलमति माताजी ने कहा कि आत्मशुद्धि के लिए इच्छाओं पर नियंत्रण करना ही तप है। जैसे खदान से निकला सोना अशुद्ध होता है और तपाने के बाद शुद्ध होता है, उसी प्रकार आत्मकल्याण के लिए तप आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अंतरंग और बहिरंग तप आत्मशुद्धि के साधन हैं। बिना पात्र में दूध को तपाए घी प्राप्त नहीं होता, उसी तरह शरीर को तपाए बिना आत्मा से कर्मों का क्षय करना कठिन है। मोक्ष मार्ग पर चलने वाले साधक के लिए यह मार्ग सरल होता है, जबकि किनारे बैठकर देखने वाले के लिए कठिन प्रतीत होता है।

जैन दर्शन के अनुसार कृष्ण और द्वारिका की कथा का मंचन

धार्मिक कार्यक्रम के दौरान जैनत्व ग्रुप की ओर से ‘द्वारिका दहन और कृष्ण का मरण’ प्रसंग पर आधारित नाटिका प्रस्तुत की गई। मंचन में जैन आगम और हरिवंश पुराण के संदर्भ में श्रीकृष्ण के जीवन तथा द्वारिका दहन से जुड़े प्रसंगों को जैन दर्शन के दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया।

नाटिका की पटकथा मंगला जैन ने लिखी और निर्देशन विकास जैन ने किया। संवाद एवं संगीत रिकॉर्डिंग आकृत जैन ने की। श्रीकृष्ण की भूमिका अभिषेक जैन, बलदाऊ की भूमिका नितिन, जरात्कुमार की भूमिका संभव और दीपापिन मुनि की भूमिका संयम ने निभाई। अनमोल, अनुज, ओम और आकृत ने पांडवों की भूमिका निभाई। यादव कुमार के पात्र आशय, आरु और अवि ने निभाए, जबकि द्वारपाल की भूमिका पुनीत ने निभाई।

अनन्या, अनुष्का, सृष्टि, जिया, मनसा और सौम्या ने नृत्य की प्रस्तुति देकर कार्यक्रम में आकर्षण बढ़ाया।

तत्त्वार्थ सूत्र का वाचन और अभिषेक

उत्तम तप धर्म के अवसर पर तत्त्वार्थ सूत्र का वाचन प्रीति जैन, उषा जैन, अमृता जैन, क्षिप्रा जैन, सपना जैन, अर्पणा जैन, संध्या जैन, निशा जैन, एकता जैन और सरोज जैन ने किया। वाचन से पहले श्रद्धालुओं ने अभिषेक और शांतिधारा की।

बुधवार को ‘16 स्वर्ग’ की प्रस्तुति

दशलक्षण महापर्व के तहत बुधवार को ‘16 स्वर्ग’ पर आधारित भव्य नाट्य प्रस्तुति होगी। इसका निर्देशन डॉ. सुप्रीत जैन और डॉ. श्रुति जैन करेंगे। प्रस्तुति में प्रवीण-शकुन जैन, विनोद-रंजना जैन, सुकुमार-सरिता, डॉ. पीसी वासल-रंजनी वासल, राकेश-सुनीता, सनत-आशा, कैलाश-मंगला, प्रमोद-रेखा, अरुण-आशा, दिनेश-ऊषा, सत्येंद्र-निधि और पद्म-ममता कलाकार के रूप में शामिल होंगे।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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