Explore

Search

September 19, 2026 7:53 pm

विकास कार्यों की धीमी गति और जनसमस्याओं को लेकर कांग्रेस नेता ने साधा निशाना, बोले- बोर्ड लगाने से नहीं बदलेगी क्षेत्र की तस्वीर

CBN36 बिलासपुर। बेलतरा विधानसभा क्षेत्र में विधायक कार्यालय के नाम ‘सेवा सदन’ को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने विधायक सुशांत शुक्ला पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि क्षेत्र में विकास और जनसमस्याओं के समाधान की यही स्थिति बनी रही तो विधायक को अपने कार्यालय का नाम ‘सेवा सदन’ से बदलकर ‘मेवा सदन’ रख लेना चाहिए। गौरहा ने यह टिप्पणी क्षेत्र में विकास कार्यों की धीमी गति, गुणवत्ता और जनसमस्याओं के समाधान को लेकर की है।

गौरहा ने कहा कि उन्होंने बेलतरा विधानसभा क्षेत्र में सड़क, नाली, जल निकासी, बिजली, पेयजल, सेंदरी-मोपका बाईपास, राजकिशोर नगर, अशोक नगर से बिरकोना मार्ग, रेत उत्खनन, साइंस कॉलेज मैदान, रियल एस्टेट और नागरिक सुविधाओं से जुड़े कई मुद्दे लगातार उठाए हैं। उनका दावा है कि इन मामलों में केवल निरीक्षण, आश्वासन या राजनीतिक बयान पर्याप्त नहीं हैं। जनता को धरातल पर काम और उसका परिणाम दिखाई देना चाहिए।

जमीनी काम और जवाबदेही पर उठाए सवाल

गौरहा ने दावा किया कि बेलतरा क्षेत्र में विकास को लेकर कई घोषणाएं और दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन आम लोगों की रोजमर्रा की परेशानियां पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। उन्होंने कहा कि किसी जनप्रतिनिधि के काम का आकलन बैठकों, घोषणाओं या प्रचार सामग्री से नहीं, बल्कि इस आधार पर होना चाहिए कि नागरिकों को सुविधाएं कितनी आसानी से मिल रही हैं।

उनका कहना है कि सड़क, नाली, जल निकासी, पेयजल, बिजली और सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़े मामलों में लोगों को बार-बार शिकायत करने की जरूरत नहीं पड़नी चाहिए। इसके लिए स्थायी समाधान और नियमित निगरानी जरूरी है। गौरहा ने मांग की कि क्षेत्र में चल रहे और प्रस्तावित विकास कार्यों की जानकारी सार्वजनिक की जाए, ताकि जनता काम की प्रगति, गुणवत्ता और समयसीमा पर सवाल पूछ सके।

गौरहा ने दावा किया कि विकास कार्यों का वास्तविक लाभ तभी माना जाएगा, जब वे कागज और घोषणाओं से निकलकर लोगों की जिंदगी में बदलाव लाएं। उन्होंने कहा कि जनता को यह भी पता होना चाहिए कि किस काम के लिए कितनी राशि स्वीकृत हुई, काम कब शुरू हुआ और उसकी गुणवत्ता की जिम्मेदारी किसकी है।

संगठन और सोशल मीडिया को लेकर भी दावा

कांग्रेस नेता ने विधायक और भाजपा संगठन की कथित आंतरिक स्थिति को लेकर भी राजनीतिक टिप्पणी की। गौरहा ने दावा किया कि क्षेत्रीय विधायक से कार्यकर्ताओं और संगठन की दूरी है तथा विधायक के व्यक्तिगत लोग ही विधानसभा क्षेत्र का संचालन कर रहे हैं।

गौरहा ने यह भी दावा किया कि उनके सोशल मीडिया पोस्ट, फोटो और वीडियो पर कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया को लेकर संगठन स्तर पर चर्चा की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि युवा मोर्चा से जुड़े कार्यकर्ताओं की बैठक में सोशल मीडिया पर राजनीतिक पोस्ट को लाइक, शेयर या प्रतिक्रिया देने को लेकर समझाइश दिए जाने की स्थिति बनी है।

गौरहा ने कहा कि यदि किसी जनप्रतिनिधि के काम और विचारों का राजनीतिक जवाब देने के बजाय कार्यकर्ताओं की सोशल मीडिया गतिविधियों पर नजर रखने की जरूरत महसूस हो रही है, तो यह स्वस्थ राजनीतिक संवाद का विषय है।

‘बोर्ड में सेवा सदन लिखने से नहीं बदलेगी तस्वीर’

गौरहा ने कहा कि ‘सेवा सदन’ नाम की असली परीक्षा इस बात से होगी कि क्षेत्र की कितनी समस्याओं का समाधान हुआ और उसका लोगों को कितना प्रत्यक्ष लाभ मिला। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों की स्वीकृति और घोषणा के साथ उनकी प्रगति, गुणवत्ता और समयसीमा भी जनता के सामने स्पष्ट होनी चाहिए।

गौरहा ने दावा किया कि केवल कार्यालय के बाहर ‘सेवा सदन’ का बोर्ड लगा देने से बेलतरा क्षेत्र की तस्वीर नहीं बदलेगी। उन्होंने कहा कि यदि आने वाले समय में भी क्षेत्र की समस्याओं का अपेक्षित समाधान नहीं हुआ तो विधायक सुशांत शुक्ला को अपने कार्यालय का नाम ‘सेवा सदन’ से बदलकर ‘मेवा सदन’ कर लेना चाहिए।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

Advertisement Carousel
CRIME NEWS

BILASPUR NEWS