वन-पर्यावरण स्वीकृति, माइनिंग प्लान और खनन पट्टा मिलने के बाद ही शुरू हो सकेगा काम
CBN36 रायपुर, 13 सितंबर। हसदेव-अरण्य क्षेत्र के तारा कोल ब्लॉक में अभी खनन शुरू नहीं हुआ है। फिलहाल केवल प्रतिस्पर्धात्मक नीलामी की प्रक्रिया पूरी हुई है। खनन शुरू करने से पहले माइनिंग प्लान, खनन पट्टा, पर्यावरण स्वीकृति और वन स्वीकृति समेत कई वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। इन सभी मंजूरियों के बाद ही मौके पर वास्तविक खनन गतिविधियां शुरू करने की अनुमति मिलेगी। छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम ने यह स्थिति स्पष्ट की है।
नौ कंपनियों ने लगाई थी बोली
तारा कोल ब्लॉक की प्रतिस्पर्धात्मक नीलामी में कुल नौ बोलियां मिली थीं। प्रक्रिया पूरी होने के बाद ब्लॉक सीजी सिन एंड गैस एंड केमिकल्स लिमिटेड को मिला है। हालांकि, नीलामी में सफल होने से कंपनी को स्वत: खनन की अनुमति नहीं मिल गई है। वन और पर्यावरण से जुड़ी मंजूरियां अलग-अलग चरणों में हासिल करनी होंगी।
मंजूरी से पहले न पेड़ कटेंगे, न खनन होगा
निगम के मुताबिक वन स्वीकृति के विभिन्न चरण पूरे करना जरूरी होगा। इसके साथ ही परियोजना के पर्यावरणीय प्रभावों का निर्धारित मानकों के अनुसार परीक्षण किया जाएगा। सभी जरूरी वैधानिक अनुमतियां मिलने से पहले पेड़ों की कटाई अथवा वास्तविक खनन गतिविधि शुरू नहीं की जा सकती।
यानी नीलामी, वन एवं पर्यावरण स्वीकृति और खनन की अनुमति-तीनों अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं।
2011 में सीएमडीसी को मिला था तारा ब्लॉक
तारा कोल ब्लॉक वर्ष 2011 में छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम को आवंटित किया गया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के परिणामस्वरूप अन्य कोल ब्लॉकों के साथ इसका पूर्व आवंटन भी निरस्त हो गया था। इसके बाद वर्तमान व्यवस्था में वाणिज्यिक कोयला खनन के लिए प्रतिस्पर्धात्मक नीलामी की प्रक्रिया अपनाई गई।
पीईकेबी को 2011 और 2012 में मिली थी वन स्वीकृति
दस्तावेज के अनुसार हसदेव-अरण्य क्षेत्र के कोल ब्लॉकों से जुड़ी वन और पर्यावरण स्वीकृतियों की प्रक्रिया पहले भी आगे बढ़ती रही है। वर्ष 2011 में वन सलाहकार समिति की प्रतिकूल अनुशंसा के बावजूद केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के स्तर पर तारा और परसा ईस्ट केते बासन (पीईकेबी) के संबंध में वन स्वीकृति देने का निर्णय लिया गया था।
पीईकेबी को जुलाई 2011 में स्टेज-1 और मार्च 2012 में स्टेज-2 फॉरेस्ट क्लियरेंस मिली थी। इसी अवधि में परियोजना की पर्यावरणीय स्वीकृति की प्रक्रिया भी आगे बढ़ी।
मोरगा कोल ब्लॉक का मामला भी लंबित
हसदेव-अरण्य में कोयला संसाधनों के उपयोग का मामला केवल तारा तक सीमित नहीं है। मोरगा कोल ब्लॉक के आवंटन का विषय भी लंबित है। पूर्ववर्ती राज्य सरकार ने इसे छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के पक्ष में आवंटित करने के लिए केंद्रीय कोयला मंत्रालय से अनुरोध किया था।
राज्य सरकार के पत्र में मोरगा से लगे मदनपुर कोल ब्लॉक के मदनपुर साउथ ब्लॉक का भी उल्लेख किया गया था। पत्र के अनुसार यह ब्लॉक केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने आंध्र प्रदेश मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन को आवंटित किया था। इसी आधार पर मोरगा कोल ब्लॉक सीएमडीसी को आवंटित करने का अनुरोध किया गया था।
वैज्ञानिक अध्ययन में जैव विविधता पर भी फोकस
हसदेव-अरण्य क्षेत्र में भविष्य की खनन गतिविधियों को लेकर भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद ने विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन किया। इसमें जैव विविधता, वन्यजीव, जलग्रहण क्षेत्र और पर्यावरणीय संवेदनशीलता का आकलन किया गया। अध्ययन में तारा समेत कुछ अन्य कोल ब्लॉकों को कड़े पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों और संरक्षण प्रावधानों के साथ खनन के लिए विचार योग्य माना गया।
वन क्षेत्र बढ़ने के आंकड़े भी सामने रखे
दस्तावेज में वन संरक्षण और वृक्षारोपण को राज्य की प्राथमिकता बताते हुए फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट-2023 के आंकड़ों का हवाला दिया गया है। इसके अनुसार 2021 से 2023 के बीच छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्राच्छादन में 683.62 वर्ग किलोमीटर की शुद्ध वृद्धि हुई, जो देश के राज्यों में सर्वाधिक थी। इसी अवधि में राज्य के वनावरण में 702.75 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि दर्ज की गई।
ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण के बीच संतुलन का दावा
राज्य खनिज विकास निगम का कहना है कि देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों और विद्युत आपूर्ति की निरंतरता के लिए घरेलू कोयला संसाधनों का उपयोग जरूरी है। वहीं किसी भी खनन परियोजना में वन एवं पर्यावरण स्वीकृति, वैज्ञानिक अध्ययन, प्रतिपूरक वनीकरण और अन्य पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
निगम ने स्पष्ट किया है कि तारा कोल ब्लॉक में फिलहाल खनन शुरू नहीं हुआ है। सभी निर्धारित वैधानिक प्रक्रियाएं और जरूरी मंजूरियां पूरी होने के बाद ही खनन की अनुमति दी जा सकेगी।
प्रधान संपादक




