
“बस्तर के छिंदगांव की महिला किसान ने बकरी, गाय और मुर्गीपालन के साथ सुगंधित धान व सब्जियों की खेती को बनाया आय का जरिया”
CBN36 रायपुर।बस्तर जिले के ग्राम छिंदगांव की महिला किसान रैबाली कश्यप ने एकीकृत कृषि को अपनाकर सफलता की नई मिसाल पेश की है। जागृति महिला समूह से जुड़ी रैबाली ने पारंपरिक खेती से आगे बढ़ते हुए एक ही स्थान पर बकरीपालन, गायपालन, मुर्गीपालन, सुगंधित धान और सब्जियों की खेती शुरू की। अलग-अलग कृषि गतिविधियों के संयोजन से उन्हें सालभर आमदनी का जरिया मिला है और अब वह सालाना डेढ़ लाख रुपये से अधिक का शुद्ध मुनाफा कमा रही हैं।
पांच गतिविधियों को एक साथ जोड़ा
रैबाली पहले खेती से परिवार की बुनियादी जरूरतें पूरी करती थीं। एकीकृत कृषि क्लस्टर से जुड़ने के बाद उन्होंने अपनी जमीन और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए पांच प्रमुख गतिविधियां शुरू कीं। इससे उन्हें खेती के साथ पशुपालन और मुर्गीपालन से भी नियमित आय मिलने लगी।
बकरीपालन से सबसे अधिक आमदनी
रैबाली को बकरीपालन से करीब 60 हजार रुपये सालाना आय हो रही है। इसके अलावा मुर्गीपालन से 30 हजार, सब्जियों के उत्पादन से 24 हजार, गायपालन से 20 हजार और सुगंधित धान से करीब 20 हजार रुपये की आय प्राप्त हो रही है। इन गतिविधियों से होने वाली आय ने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है।
बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य पर दे रहीं ध्यान
एकीकृत कृषि से मिली आर्थिक मजबूती के बाद रैबाली अब अपने बच्चों की बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हैं। परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में उनकी भूमिका बढ़ी है और गांव में भी उनकी मेहनत को सम्मान मिल रहा है।
किसानों को दे रहीं एकीकृत खेती अपनाने का संदेश
रैबाली कश्यप की सफलता अब आसपास के किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है। उनका मानना है कि किसान एक ही फसल पर निर्भर रहने के बजाय खेती के साथ पशुपालन और मुर्गीपालन जैसी गतिविधियों को जोड़ें तो सालभर आय के अवसर पैदा किए जा सकते हैं। वह अन्य किसानों से एकीकृत कृषि अपनाने, आय बढ़ाने और परिवार को खुशहाल बनाने की अपील कर रही हैं।
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