सरस्वती साइकिल योजना से बदली दिनचर्या, पढ़ाई के साथ खेलकूद और रचनात्मक गतिविधियों के लिए भी मिल रहा समय
CBN 36 बिलासपुर, 9 अगस्त। घर से स्कूल की दूरी, आने-जाने में लगने वाला समय और रोज की थकान कई बार बेटियों की पढ़ाई में बाधा बन जाती है। ऐसे में छत्तीसगढ़ सरकार की सरस्वती साइकिल योजना छात्राओं के लिए शिक्षा की राह आसान करने के साथ उनके आत्मविश्वास को भी बढ़ा रही है। चकरभाठा स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी माध्यम विद्यालय की कक्षा नौवीं की छात्रा हंसिका नेताम इसका उदाहरण हैं।
हंसिका बताती हैं कि पहले घर से स्कूल आने-जाने में काफी समय लगता था। लंबी दूरी तय करने के कारण थकान भी होती थी और कई बार समय पर स्कूल पहुंचना मुश्किल हो जाता था। इसका असर पढ़ाई और दूसरी शैक्षणिक गतिविधियों पर भी पड़ता था।
साइकिल मिली तो बचने लगा समय
सरस्वती साइकिल योजना के तहत निःशुल्क साइकिल मिलने के बाद हंसिका की दिनचर्या बदल गई। अब वह कम समय में आसानी से स्कूल पहुंच जाती हैं। आने-जाने में समय कम लगने से पढ़ाई, गृहकार्य के साथ खेलकूद और अन्य रचनात्मक गतिविधियों के लिए भी उन्हें पर्याप्त समय मिल जाता है।
आत्मनिर्भरता का बढ़ा एहसास
हंसिका के मुताबिक, साइकिल मिलने से अब वह बिना किसी पर निर्भर हुए खुद स्कूल आती-जाती हैं। इससे उनके भीतर आत्मविश्वास बढ़ा है और पढ़ाई के प्रति उत्साह भी पहले से अधिक हुआ है। वहीं, बेटी के आने-जाने को लेकर परिवार की चिंता भी कम हुई है।
बालिका शिक्षा को बढ़ावा दे रही योजना
छत्तीसगढ़ शासन की सरस्वती साइकिल योजना का उद्देश्य बालिकाओं को स्कूल तक सुगम आवागमन उपलब्ध कराकर उनकी शिक्षा को बढ़ावा देना है। योजना के तहत कक्षा नौवीं में अध्ययनरत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और बीपीएल परिवारों की छात्राओं को निःशुल्क साइकिल प्रदान की जाती है।
योजना से न केवल छात्राओं की विद्यालय तक पहुंच आसान हो रही है, बल्कि नियमित उपस्थिति, आत्मविश्वास और पढ़ाई के प्रति रुचि को भी बढ़ावा मिल रहा है। हंसिका जैसी छात्राओं के लिए यह साइकिल महज आवागमन का साधन नहीं, बल्कि शिक्षा और बेहतर भविष्य की ओर बढ़ने का जरिया बन रही है।
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