CBN36 बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने फोन टैपिंग मामले में श्री रावतपुरा संस्थान के चेयरमैन एवं कथावाचक श्री रावतपुरा सरकार (रवि शंकर जी महाराज) को बड़ी राहत देते हुए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की फोन टैपिंग कार्रवाई को पूरी तरह अवैध करार दिया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने टैपिंग के जरिए जुटाए गए सभी ऑडियो रिकॉर्ड नष्ट करने का आदेश दिया है। हालांकि, अदालत ने CBI की एफआईआर और चार्जशीट को रद्द करने से इनकार कर दिया।
खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि अब CBI इस मामले में फोन टैपिंग से प्राप्त किसी भी साक्ष्य का उपयोग नहीं कर सकेगी। एजेंसी को मामले को अन्य वैध दस्तावेजों और गवाहों के आधार पर विशेष CBI अदालत में साबित करना होगा।
35 मेडिकल कॉलेजों से जुड़ा है मामला
CBI ने 30 जून 2025 को देशभर के 35 मेडिकल संस्थानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। आरोप था कि स्वास्थ्य मंत्रालय और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के कुछ अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर रिश्वत, फर्जी मरीज और कथित “घोस्ट फैकल्टी” के जरिए मेडिकल कॉलेजों के पक्ष में निरीक्षण रिपोर्ट तैयार कराई जाती थी।
इसी मामले में श्री रावतपुरा सरकार इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, रायपुर के चेयरमैन होने के कारण श्री रावतपुरा सरकार को भी आरोपी बनाया गया था। CBI ने उनके फोन की टैपिंग के लिए 28 जून 2025 को आदेश जारी किया था।
बैकडेट मंजूरी पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान गृह मंत्रालय और दूरसंचार विभाग की ओर से दायर हलफनामे में टैपिंग को 1 जून 2025 से 31 जुलाई 2025 तक वैध बताया गया। इस पर हाईकोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताते हुए पूछा कि जब मूल आदेश 28 जून को जारी हुआ, तो उससे पहले की अवधि के लिए मंजूरी कैसे दी जा सकती है।
अदालत ने यह भी पाया कि फोन टैपिंग के आदेश में न तो किसी सार्वजनिक आपातस्थिति का उल्लेख था और न ही जनसुरक्षा से जुड़े ऐसे कारण बताए गए थे, जो कानून के तहत आवश्यक हैं। अदालत के अनुसार आदेश बिना पर्याप्त कानूनी आधार के जारी किया गया।
निजता के अधिकार पर जोर
हाईकोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि फोन टैपिंग किसी व्यक्ति की निजता के अधिकार पर गंभीर हस्तक्षेप है। इसलिए इसके लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का कड़ाई से पालन किया जाना अनिवार्य है।
खंडपीठ ने 28 जून 2025 का CBI का टैपिंग आदेश, 4 जुलाई 2025 का गृह मंत्रालय का पुष्टि आदेश तथा 15 सितंबर 2025 को रिव्यू कमेटी की कार्यवाही को निरस्त कर दिया।
ट्रायल जारी रहेगा
अदालत ने एफआईआर और चार्जशीट को वैध मानते हुए रायपुर की विशेष CBI अदालत को निर्देश दिया कि वह फोन टैपिंग से प्राप्त सभी साक्ष्यों को पूरी तरह नजरअंदाज करे और केवल अन्य वैध दस्तावेजों एवं गवाहों के आधार पर मामले की सुनवाई आगे बढ़ाए।
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