
“आईजी राम गोपाल गर्ग ने कहा कि डिजिटल तकनीकों के प्रभावी उपयोग से पुलिसिंग की गुणवत्ता में सुधार होगा, थानों में लंबित प्रकरणों की संख्या घटेगी और आम जनता को समयबद्ध एवं पारदर्शी न्यायिक प्रक्रिया का लाभ मिलेगा, उन्होंने सभी पुलिस अधीक्षकों को निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने और टीम भावना के साथ बेहतर पुलिसिंग करने का आह्वान किया”
CBN36 बिलासपुर। बिलासपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक आईपीएस राम गोपाल गर्ग ने रेंज स्तरीय समीक्षा बैठक लेकर सभी जिलों के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों और पुलिस अधीक्षकों को न्याय प्रणाली को अधिक पारदर्शी, तकनीक आधारित और समयबद्ध बनाने के निर्देश दिए। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित बैठक में डिजिटल पुलिसिंग, ई-समन, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से गवाही (न्याय श्रुति), ई-साक्ष्य, न्यायालयीन समन-वारंट की तामिली, अवैध प्रवासियों के सत्यापन और संपत्ति अपराधों की निगरानी जैसे महत्वपूर्ण विषयों की विस्तृत समीक्षा की गई।
आईजी गर्ग ने स्पष्ट कहा कि पुलिसिंग में तकनीक का शत-प्रतिशत उपयोग सुनिश्चित किया जाए ताकि लंबित मामलों का शीघ्र निराकरण हो सके और न्याय प्रक्रिया अधिक प्रभावी बन सके। उन्होंने सभी अधिकारियों को गुणवत्ता, शुद्धता और समयबद्धता के साथ कार्य करने तथा प्रत्येक मॉड्यूल का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में बिलासपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह, रायगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह, मुंगेली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल, कोरबा के पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के पुलिस अधीक्षक मनोज खिलारी, सक्ती के पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर, जांजगीर-चांपा के पुलिस अधीक्षक विजय पांडेय, सारंगढ़ के पुलिस अधीक्षक सुनील शर्मा तथा रेंज कार्यालय के उप पुलिस अधीक्षक विवेक शर्मा मौजूद रहे।
गूगल शीट से होगी समन-वारंट की रियल टाइम निगरानी
आईजी ने निर्देश दिए कि न्यायालयीन समन और वारंट की मॉनिटरिंग अब गूगल शीट के माध्यम से की जाएगी। थानों में पदस्थ कोर्ट आरक्षक तामिली की स्थिति, अदम तामिली के कारण तथा गवाहों की उपस्थिति का पूरा विवरण ऑनलाइन दर्ज करेंगे। इससे अनावश्यक पत्राचार समाप्त होगा, डेटा एकीकृत रहेगा और हाईकोर्ट में लंबित मामलों के त्वरित निराकरण में सहायता मिलेगी।
व्हाट्सएप से भी होगा ई-समन का पालन
बैठक में ई-समन व्यवस्था की समीक्षा करते हुए बताया गया कि जारी अधिसूचना के अनुसार अब व्हाट्सएप के माध्यम से भी ई-समन की तामिली की जा सकेगी। प्राप्तकर्ता द्वारा भेजा गया ‘ओके’ संदेश और उसका स्क्रीनशॉट वैध माना जाएगा। आईजी ने नए जिलों में डेटा मैपिंग से जुड़ी तकनीकी समस्याओं और दूरस्थ थानों में नेटवर्क व लैट-लॉन्ग अपलोड संबंधी दिक्कतों को शीघ्र दूर करने के निर्देश दिए।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होगी गवाही
न्यायालयीन प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए सभी थानों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा से जोड़ने और आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। साथ ही न्यायालयों से अनुरोध किया जाएगा कि समन जारी करते समय गवाही का माध्यम—वीसी या भौतिक उपस्थिति—स्पष्ट रूप से अंकित किया जाए।
ई-साक्ष्य और ‘आइडियल CCTNS थाना’ पर विशेष जोर
आईजी गर्ग ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 105 के तहत जब्ती, तलाशी और गवाहों के बयान की वीडियो रिकॉर्डिंग को अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश दिए। प्रत्येक जिले में एक थाने को ‘आइडियल CCTNS थाना’ के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां विवेचक स्वयं सभी ऑनलाइन प्रविष्टियां करेंगे और डिजिटल रिकॉर्डिंग को प्राथमिकता देंगे।
अवैध प्रवासियों और किरायेदारों का नियमित सत्यापन
आईजी ने समाधान ऐप के माध्यम से अवैध प्रवासियों, किरायेदारों और फेरीवालों का नियमित सत्यापन अनिवार्य करने के निर्देश दिए। सभी जिलों को इसकी साप्ताहिक रिपोर्ट रेंज कार्यालय को भेजने के लिए कहा गया।
बाइक चोरी के मामलों में इंजन और चेसिस नंबर अनिवार्य
संपत्ति अपराधों की समीक्षा के दौरान आईजी ने निर्देश दिए कि बाइक चोरी जैसे मामलों में एफआईआर दर्ज करते समय इंजन और चेसिस नंबर का उल्लेख अनिवार्य रूप से किया जाए, ताकि संबंधित डेटाबेस को अद्यतन कर चोरी के वाहनों की ट्रैकिंग अधिक प्रभावी बनाई जा सके।
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