2025 बैच के प्रशिक्षु डिप्टी कलेक्टरों से मुलाकात, बोले- संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जवाबदेही को बनाएं कार्यशैली का आधार
CBN36 रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रशासनिक सेवा में चयन केवल उपलब्धि नहीं, बल्कि जनसेवा का अवसर है। अधिकारी यदि कर्तव्यनिष्ठा, ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ कार्य करेंगे तो शासन के प्रति जनता का विश्वास स्वतः मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना ही प्रशासनिक सेवा की वास्तविक सफलता है।
मुख्यमंत्री बुधवार को राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ राज्य प्रशासनिक सेवा के वर्ष 2025 बैच के प्रशिक्षु डिप्टी कलेक्टरों से सौजन्य मुलाकात कर रहे थे। उन्होंने सभी प्रशिक्षु अधिकारियों को भावी प्रशासनिक दायित्वों के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रशासनिक अधिकारी शासन और जनता के बीच सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं। उनके निर्णय, व्यवहार और कार्यशैली से सरकार की छवि बनती है। इसलिए प्रत्येक अधिकारी को संवेदनशीलता, पारदर्शिता, ईमानदारी और जवाबदेही को अपने कार्य का मूल आधार बनाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जमीनी स्तर पर कार्य करते समय स्थानीय परिस्थितियों और लोगों की अपेक्षाओं को समझना जरूरी है। यदि अधिकारी लोगों की समस्याओं को गंभीरता से सुनकर समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करें तो प्रशासन के प्रति जनता का विश्वास और मजबूत होगा।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है। यहां खनिज संपदा, वन संपदा, उर्वर भूमि और मजबूत ऊर्जा क्षमता उपलब्ध है। इन संसाधनों का बेहतर उपयोग कर राज्य को विकसित बनाने में प्रशासनिक अधिकारियों की अहम भूमिका होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि लंबे समय तक प्रदेश के विकास में नक्सलवाद बाधा रहा, लेकिन सुरक्षा बलों के साहस, केंद्र और राज्य सरकार की समन्वित रणनीति तथा जनता के विश्वास के कारण अब नक्सलवाद समाप्त हो चुका है। जिन क्षेत्रों तक कभी विकास पहुंचना कठिन था, वहां आज सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पेयजल सहित मूलभूत सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है।
उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों से कहा कि उन्हें दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में भी कार्य करने का अवसर मिलेगा। ऐसे क्षेत्रों में केवल प्रशासनिक दायित्व निभाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का संकल्प भी होना चाहिए। जनजातीय समाज के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रशासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। इसी उद्देश्य से सुशासन एवं अभिसरण विभाग की स्थापना की गई है तथा ई-ऑफिस प्रणाली लागू कर शासन की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, दक्ष और समयबद्ध बनाया गया है। नई तकनीकों का उपयोग नागरिकों को बेहतर और त्वरित सेवाएं देने के लिए किया जाना चाहिए।
राजस्व मामलों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भूमि, नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा और अन्य राजस्व प्रकरण सीधे आम नागरिकों के जीवन से जुड़े होते हैं। ऐसे मामलों में समय पर राहत मिलना जरूरी है। कई बार अधिकारी की छोटी-सी पहल भी किसी परिवार की बड़ी समस्या का समाधान बन सकती है। इसलिए प्रत्येक प्रकरण को मानवीय दृष्टिकोण से देखते हुए संवेदनशीलता के साथ निराकरण किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को व्यवहार में विनम्रता और संयम बनाए रखने की सलाह देते हुए कहा कि लोगों की शिकायतों को सुनना प्रशासन की पहली जिम्मेदारी है। कई बार धैर्यपूर्वक शिकायत सुन लेने से ही आधी समस्या समाप्त हो जाती है। यदि अधिकारी जनता से संवाद नहीं करेंगे तो छोटी समस्याएं भी बड़े विवाद का रूप ले सकती हैं। इसलिए अधिकारियों को हमेशा सहज, सुलभ और उत्तरदायी रहना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने प्रशिक्षु अधिकारियों से उनके प्रशिक्षण अनुभवों की जानकारी भी ली और उन्हें भविष्य में अपने पदेन दायित्वों का कुशलतापूर्वक निर्वहन करते हुए प्रदेश के विकास और सुशासन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी के संचालक टी.सी. महावर ने बताया कि वर्ष 2025 बैच के राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारियों का इंडक्शन प्रशिक्षण पूर्ण हो चुका है। अब सभी सात प्रशिक्षु अधिकारी प्रदेश के विभिन्न जिलों में डिप्टी कलेक्टर के रूप में पदस्थ होकर विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करेंगे।
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