बिलासपुर। स्नान-दान पूर्णिमा के अवसर पर सोमवार को रेलवे परिक्षेत्र स्थित जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का विधि-विधान से महाभिषेक किया गया। परंपरा के अनुसार महास्नान के बाद महाप्रभु ‘अनासर’ (विश्राम काल) में चले गए हैं। इसके साथ ही मंदिर के पट आगामी 15 दिनों के लिए श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ बंद कर दिए गए हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार स्नान-दान पूर्णिमा पर भगवान जगन्नाथ का वर्ष में एक बार महास्नान कराया जाता है। शास्त्रों में वर्णित परंपरा के अनुसार 108 कलशों के पवित्र जल तथा विभिन्न औषधीय जड़ी-बूटियों से भगवान का अभिषेक किया जाता है। मान्यता है कि इस महास्नान के बाद महाप्रभु अस्वस्थ हो जाते हैं और स्वास्थ्य लाभ के लिए लगभग 15 दिनों तक विश्राम करते हैं। इसी अवधि को ‘अनासर’ कहा जाता है।
इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए सोमवार को जगन्नाथ मंदिर में महाप्रभु का पावन जल से महाभिषेक संपन्न हुआ। अनुष्ठान के बाद मंदिर के पट बंद कर दिए गए, जिससे अगले 15 दिनों तक श्रद्धालु भगवान के प्रत्यक्ष दर्शन नहीं कर सकेंगे।
इस अवधि में भगवान को छप्पन भोग अर्पित नहीं किया जाता। उनकी सेवा में केवल हल्का एवं सात्विक भोजन, फलों का रस तथा आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों से तैयार विशेष काढ़ा (दशमूल मोदक) का भोग लगाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इसके बाद महाप्रभु पूर्णतः स्वस्थ होकर पुनः भक्तों को दर्शन देते हैं।
प्रधान संपादक


