Explore

Search

September 28, 2026 6:54 am

फर्जी इंस्टाग्राम आईडी बनाकर रची साजिश, खुद ही भेजे अश्लील मैसेज, अब पहुंची सलाखों के पीछे

छत्तीसगढ़ बिलासपुर। सोशल मीडिया पर बदनाम करने की नीयत से रची गई एक सुनियोजित साजिश का तोरवा पुलिस ने पर्दाफाश किया है। एक युवती ने अपने पूर्व परिचित के नाम से फर्जी इंस्टाग्राम आईडी बनाकर अश्लील और धमकीपूर्ण संदेश प्रसारित किए। इतना ही नहीं, उसी फर्जी आईडी के खिलाफ स्वयं शिकायतकर्ता बनकर पुलिस को गुमराह करने का प्रयास भी किया। तकनीकी जांच में पूरा मामला उजागर होने के बाद पुलिस ने आरोपिया को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

मामले की शुरुआत तब हुई जब तिफरा निवासी संजय रात्रे ने थाना तोरवा में शिकायत दर्ज कराई कि उसके नाम से फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट संचालित कर अश्लील संदेश भेजे जा रहे हैं, जिससे उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित हो रही है। शिकायत मिलते ही पुलिस ने साइबर तकनीकी जांच शुरू की और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया।

जांच के दौरान सामने आया कि जिस फर्जी इंस्टाग्राम आईडी से संदेश भेजे जा रहे थे, उसका संचालन शिव मंदिर के पास निवासी 26 वर्षीय प्रीति सूर्यवंशी कर रही थी। पुलिस को मिले इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से यह भी स्पष्ट हुआ कि आरोपिया ने जानबूझकर प्रार्थी के नाम का उपयोग कर फर्जी प्रोफाइल तैयार की थी।

विवेचना में एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। जनवरी 2026 में प्रीति सूर्यवंशी ने स्वयं थाना तोरवा में शिकायत दर्ज कराई थी कि संजय रात्रे के नाम से संचालित इंस्टाग्राम आईडी से उसे ब्लैकमेल किया जा रहा है और अश्लील तस्वीरें भेजी जा रही हैं। लेकिन तकनीकी जांच में पता चला कि जिस आईडी के खिलाफ शिकायत की गई थी, उसका संचालन भी स्वयं आरोपिया ही कर रही थी। उसने खुद को संदेश भेजकर उनके स्क्रीनशॉट तैयार किए और उन्हीं के आधार पर शिकायत दर्ज कराई थी।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि संजय रात्रे और प्रीति सूर्यवंशी पूर्व में प्रेम संबंध में थे। उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों से संकेत मिले हैं कि व्यक्तिगत विवाद के चलते फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट बनाकर प्रार्थी को बदनाम करने की कोशिश की गई।

पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर तोरवा पुलिस ने 21 जून 2026 को आरोपिया प्रीति सूर्यवंशी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। मामले में अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच अभी जारी है।

यह कार्रवाई एक बार फिर साबित करती है कि साइबर अपराधों में छोड़े गए डिजिटल निशान आखिरकार सच्चाई तक पहुंच ही जाते हैं और तकनीक का दुरुपयोग करने वालों को कानून के सामने जवाब देना पड़ता है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

Advertisement Carousel
CRIME NEWS

BILASPUR NEWS