बिलासपुर, 4 जून। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि शासन-प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी जनसमस्याओं का संवेदनशील, पारदर्शी और समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राजस्व प्रकरणों के त्वरित निपटारे, पेयजल व्यवस्था की सुदृढ़ निगरानी तथा किसानों को समय पर खाद-बीज उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी कार्रवाई की जाए।
मुख्यमंत्री गुरुवार को सुशासन तिहार के अंतर्गत बिलासपुर प्रवास के दौरान बिलासपुर, मुंगेली, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, सक्ती और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों के अधिकारियों की संयुक्त समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में विकास कार्यों की प्रगति, राजस्व मामलों, स्वास्थ्य सेवाओं, पेयजल व्यवस्था और खरीफ सीजन की तैयारियों की समीक्षा की गई।
समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने समय-सीमा से बाहर तथा एक वर्ष से अधिक समय से लंबित राजस्व प्रकरणों के निराकरण के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन सहित अन्य राजस्व मामले सीधे नागरिकों के जीवन और आजीविका से जुड़े होते हैं, इसलिए इनके निपटारे में अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए।
ग्रीष्मकालीन परिस्थितियों को देखते हुए मुख्यमंत्री ने सभी जिलों में पेयजल व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता देने को कहा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि किसी भी क्षेत्र में पेयजल संकट की स्थिति उत्पन्न न होने पाए तथा इसके लिए सतत निगरानी और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने आगामी वर्षा ऋतु में संभावित मौसमी बीमारियों की रोकथाम और उपचार के लिए अग्रिम तैयारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नागरिकों को स्वास्थ्य सेवाओं और मूलभूत सुविधाओं के संबंध में किसी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए।
खरीफ सीजन की तैयारियों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने खाद एवं बीज की उपलब्धता, भंडारण और वितरण व्यवस्था की जानकारी ली। उन्होंने कलेक्टरों को निर्देश दिए कि किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में खाद और बीज उपलब्ध कराया जाए तथा वितरण व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी रहे।
मुख्यमंत्री ने पश्चिम एशिया की परिस्थितियों के कारण डीएपी उर्वरक की सीमित उपलब्धता का उल्लेख करते हुए किसानों को वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया। उन्होंने एसएसपी, यूरिया, नैनो यूरिया और नैनो डीएपी जैसे विकल्पों के उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही। उनका कहना था कि संतुलित उर्वरक उपयोग और वैज्ञानिक खेती से उत्पादन बढ़ाने के साथ खेती की लागत भी कम की जा सकती है।
बैठक में मुख्यमंत्री ने कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण और आवश्यक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाए, जिससे वे तकनीक आधारित कृषि गतिविधियों से जुड़कर आत्मनिर्भर बन सकें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन तिहार केवल शिकायतों के निराकरण का अभियान नहीं, बल्कि सरकार और जनता के बीच विश्वास एवं संवाद को मजबूत करने का माध्यम है। उन्होंने समाधान शिविरों में आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी को शासन के प्रति बढ़ते विश्वास का संकेत बताया।
बैठक में केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री अरुण साव, सांसद कमलेश जांगड़े, विभिन्न जनप्रतिनिधि तथा पांचों जिलों के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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