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May 3, 2026 5:40 pm

छत्तीसगढ़ की जड़ी-बूटियों से महकेगा नारी शक्ति का स्वावलंबन,औषधि पादप बोर्ड की पहल से आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रहीं ग्रामीण महिलाएं

चेहरे पर उभरती आत्मविश्वास की मुस्कान एक समृद्ध और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की सशक्त तस्वीर प्रस्तुत करती वनांचल की महिलाये”

(धनंजय राठौर संयुक्त संचालक अशोक कुमार चंद्रवंशी सहायक जनसंपर्क अधिकारी)

रायपुर, 03 मई 2026।छत्तीसगढ़ के वनांचल में पाई जाने वाली समृद्ध औषधीय संपदा अब केवल स्वास्थ्य का आधार नहीं, बल्कि महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का सशक्त माध्यम बनती जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की योजनाएं वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप तथा औषधि पादप बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम के मार्गदर्शन में धरातल पर प्रभावी रूप से लागू हो रही हैं।

राज्य में गिलोय, कालमेघ, बहेड़ा, सफेद मूसली, जंगली हल्दी, गुड़मार, अश्वगंधा और शतावरी जैसी औषधीय वनस्पतियों से विभिन्न उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिल रही है।

पारंपरिक ज्ञान को मिल रही वैज्ञानिक पहचान

वन क्षेत्रों में पीढ़ियों से संजोया गया पारंपरिक औषधीय ज्ञान अब वैज्ञानिक पद्धति से जोड़ा जा रहा है। इसके तहत स्थानीय वैद्यों और पारंपरिक ज्ञान रखने वाली महिलाओं की पहचान कर उन्हें मंच उपलब्ध कराया जा रहा है।

इस पहल से न केवल उनकी विशेषज्ञता को मान्यता मिल रही है, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनने का अवसर भी प्राप्त हो रहा है।

संग्रहण से प्रसंस्करण तक-उद्यमिता की नई दिशा

जड़ी-बूटी संग्रहण तक सीमित रहने वाली महिलाएं अब प्रसंस्करण और उत्पादन में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। स्व-सहायता समूहों को आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे कच्चे उत्पाद को मूल्यवर्धित उत्पादों में बदल सकें।

राज्य में 1500 से अधिक पारंपरिक वैद्यों के ज्ञान का संरक्षण करते हुए, औषधीय पादप बोर्ड विपणन और तकनीकी सहायता के माध्यम से इस क्षेत्र को संगठित रूप दे रहा है।

मूल्य संवर्धन से बढ़ी आय

राज्य सरकार ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ ब्रांड के तहत जड़ी-बूटियों के उत्पादों को बाजार में पहचान दिला रही है।

महिलाएं अब कच्ची जड़ी-बूटियों को साफ, सुखाकर चूर्ण, अर्क और तेल के रूप में परिवर्तित कर रही हैं, जिससे उत्पादों का मूल्य कई गुना बढ़ रहा है।

65 से अधिक लघु वनोपज प्रजातियों की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी और प्रसंस्करण से बिचौलियों की भूमिका कम हुई है और लाभ सीधे हितग्राहियों तक पहुंच रहा है।

वैश्विक पहचान की ओर ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’

छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर क्षेत्र, दुर्लभ औषधीय वनस्पतियों का भंडार है। यहां 160 से अधिक प्रजातियों की जड़ी-बूटियां पाई जाती हैं।बोर्ड द्वारा विपणन व्यवस्था को सुदृढ़ करते हुए प्रदर्शनियों और रिटेल आउटलेट्स के माध्यम से उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है।

वोकल फॉर लोकल और लखपति दीदी जैसे अभियानों को भी इससे मजबूती मिल रही है।

नर्सरी प्रबंधन से रोजगार के अवसर

औषधीय पौधों की ‘मदर नर्सरी’ विकसित करने का कार्य महिला समूहों को सौंपा जा रहा है। इससे दुर्लभ प्रजातियों का संरक्षण हो रहा है और स्थानीय स्तर पर स्थायी रोजगार सृजित हो रहा है।

साथ ही, किचन गार्डन और कंटेनर गार्डनिंग के माध्यम से घरों में भी जड़ी-बूटियों की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है।

समृद्ध नारी, सशक्त छत्तीसगढ़

राज्य सरकार की यह समेकित पहल यह दर्शाती है कि योजनाओं का सही क्रियान्वयन किस प्रकार सामाजिक और आर्थिक बदलाव ला सकता है।आज छत्तीसगढ़ की महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर न केवल अपने परिवार बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी सशक्त कर रही हैं।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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