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April 29, 2026 7:23 pm

कलेक्टर की सख्ती: जेडी को 3 दिन में अंतिम जांच रिपोर्ट सौंपने का अल्टीमेटम

बिलासपुर। शिक्षा विभाग में युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और कोटा विकासखंड में सामने आए करीब 30 लाख रुपये के ‘भृत्य घोटाले’ ने प्रशासन को सक्रिय कर दिया है। कांग्रेस नेता अंकित गौरहा की शिकायत पर कलेक्टर ने संयुक्त संचालक (जेडी) शिक्षा को स्मरण-पत्र जारी करते हुए तीन दिनों के भीतर जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे और बाबू सुनील यादव से जुड़े प्रकरण की अंतिम जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

शिकायत पर कलेक्टर का सीधा हस्तक्षेप

दस्तावेजों के साथ की गई शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने मामले में सीधे दखल दिया है। लंबे समय से विभाग में चल रहे कथित भ्रष्टाचार और आंतरिक विवाद अब प्रशासनिक जांच के दायरे में आ गए हैं।

नियमों की अनदेखी कर पोस्टिंग का आरोप

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने कलेक्टर और जिला स्तरीय समिति को दरकिनार कर शिक्षकों की पदस्थापना मनमाने तरीके से की। युक्तियुक्तकरण संशोधन के नाम पर नियमों की अनदेखी कर कथित रूप से ‘सेटिंग’ के जरिए लाभकारी स्थानों पर पोस्टिंग की गई।

200 मामलों में संशोधन, प्रक्रिया पर सवाल

जानकारी के अनुसार लगभग 200 प्रकरणों में बिना सक्षम अनुमति संशोधन किए गए। कई फाइलों में वैध नोटशीट और अधिकारियों के हस्ताक्षर तक नहीं हैं। कुछ मामलों में शिक्षकों को मौखिक निर्देश देकर कार्यभार ग्रहण कराया गया, जिससे प्रक्रिया की औपचारिक जांच से बचा जा सके।

अधिकारियों की भूमिका पर संदेह

प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे और बाबू सुनील यादव की भूमिका पर प्रश्न उठ रहे हैं। आरोप है कि नियमों को दरकिनार कर चयनित लोगों को लाभ पहुंचाया गया और पूरी प्रक्रिया को पर्दे के पीछे संचालित किया गया।

डीपीआई स्तर पर भी उठे सवाल

सूत्रों के मुताबिक रायपुर स्थित डीपीआई में पदस्थ उपसंचालक अशोक नारायण बंजारा के कथित संरक्षण की भी चर्चा है। इससे जांच प्रभावित होने और जिम्मेदारों को बचाने की आशंका जताई जा रही है।

तीन दिन में रिपोर्ट अनिवार्य

कलेक्टर कार्यालय ने TL नंबर 19185/25-03-2026 के तहत स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि तीन दिनों के भीतर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जाए। साथ ही यह भी पूछा गया है कि बिना कलेक्टर की अनुमति संशोधन आदेश कैसे जारी हुए और क्या इनमें आर्थिक लेन-देन शामिल है।

‘भृत्य घोटाला’ भी जांच के दायरे में

कोटा विकासखंड में एक भृत्य के खाते में ‘वर्दी धुलाई’ व अन्य मदों के नाम पर करीब 29.64 लाख रुपये के भुगतान का मामला भी जांच में शामिल है। सितंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच हर माह 4 लाख रुपये से अधिक का भुगतान होना सामान्य प्रक्रिया से परे माना जा रहा है।

निलंबन के बावजूद बड़े चेहरे सुरक्षित?

मामले में संबंधित क्लर्क और भृत्य को निलंबित किया जा चुका है, लेकिन मुख्य जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं होने से सवाल उठ रहे हैं। जिला कोषालय के कुछ कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में बताई जा रही है।

पुराने मामलों पर भी उठे प्रश्न

पूर्व में सहायक ग्रेड-2 कर्मचारी राजेश कुमार प्रताप बाली पर गबन के आरोप लगे थे, लेकिन उस मामले में भी उच्च स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई थी।

स्मरण-पत्र से प्रशासन का कड़ा संदेश

कलेक्टर द्वारा जारी स्मरण-पत्र ने स्पष्ट कर दिया है कि अब जांच में किसी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आरोप सिद्ध होने पर शिक्षा विभाग में बड़े स्तर पर प्रशासनिक कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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