“एसएसपी शशि मोहन सिंह ने बताया फर्जी आईपीएस, सीबीआई और टेलीकॉम अधिकारी बनकर लोगों को डराते थे, देशभर में 1.40 करोड़ से अधिक की ठगी का खुलासा”
रायगढ़, 24 अप्रैल।रायगढ़ साइबर पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर की जा रही बड़ी साइबर ठगी का पर्दाफाश करते हुए महिला सहित पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने राजस्थान के भीलवाड़ा में दबिश देकर आरोपियों को पकड़ा और ट्रांजिट रिमांड पर रायगढ़ लाया।
गिरोह ने रायगढ़ के सेवानिवृत्त विद्युत विभाग के अधिकारी से 36.97 लाख रुपये की ठगी की थी। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह देश के अलग-अलग राज्यों में 1.40 करोड़ से अधिक की साइबर ठगी कर चुका है।
डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर ठगी,सुने पीड़ित की आपबीती
आरोपी खुद को टेलीकॉम अधिकारी, पुलिस और सीबीआई अफसर बताकर लोगों को कॉल करते थे। मनी लॉन्ड्रिंग और गिरफ्तारी का डर दिखाकर पीड़ितों से बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कराते थे।पीड़ित से 30 जनवरी से 11 फरवरी 2026 के बीच अलग-अलग खातों में रकम जमा कराई गई।
बैंक ट्रेल से भीलवाड़ा तक पहुंची पुलिस
साइबर पुलिस ने तकनीकी जांच, कॉल डिटेल और बैंक खातों की जांच की। रकम का ट्रेल राजस्थान के भीलवाड़ा तक पहुंचने पर पुलिस टीम गठित कर वहां दबिश दी गई।मुख्य आरोपी राहुल व्यास को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिसके बाद पूरे गिरोह का खुलासा हुआ।गिरफ्तार आरोपियो में राहुल व्यास भीलवाड़ा रविराज सिंह संजय मीणा आरती राजपूत गौरव व्यास शामिल है ।
बैंक कर्मचारी निकला मास्टरमाइंड

जांच में पता चला कि गिरोह का सरगना राहुल व्यास एक बैंक कर्मचारी है। उसके साथ अन्य आरोपी रविराज सिंह, आरती राजपूत, संजय मीणा और गौरव व्यास संगठित तरीके से साइबर ठगी को अंजाम दे रहे थे।गिरोह के सदस्य खातों में रकम मंगाकर कमीशन के आधार पर आपस में बांटते थे।
मोबाइल, लैपटॉप और करोड़ों के लेनदेन के साक्ष्य
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 7 मोबाइल फोन एक लैपटॉप जब्त किए हैं। कई बैंक खातों में संदिग्ध लेनदेन मिलने पर उन्हें सीज किया गया है।
क्या कहा एसएसपी ने
एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कहा डिजिटल अरेस्ट के नाम पर आने वाले कॉल पूरी तरह ठगी हो सकते हैं। कोई भी जांच एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर पैसे ट्रांसफर नहीं कराती। सावधान रहें और सतर्क रहें अनजान कॉल पर अपनी बैंक जानकारी साझा न करें ओटीपी या पैसे ट्रांसफर करने से बचें ,संदिग्ध कॉल पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत करें
प्रधान संपादक


