
रायगढ़।ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस और जनता के बीच दूरी कम करने के उद्देश्य से एसएसपी रायगढ़ द्वारा अपनाया गया चौपाल मॉडल अब असर दिखाने लगा है। थाना पुसौर परिसर में आयोजित जन-जागरूकता कार्यक्रम में न केवल साइबर अपराध, नशा मुक्ति और महिला सुरक्षा पर चर्चा हुई, बल्कि पुलिस-जन संवाद को मजबूत करने की नई पहल भी सामने आई।
कार्यक्रम में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आईपीएस शशि मोहन सिंह ने स्पष्ट किया कि पुलिसिंग का उद्देश्य केवल अपराध नियंत्रण नहीं, बल्कि समाज के साथ विश्वास का रिश्ता बनाना भी है। उन्होंने कहा कि चौपाल आधारित संवाद के जरिए ग्रामीणों की समस्याओं को मौके पर सुनकर त्वरित समाधान किया जा रहा है, जिससे लोगों में पुलिस के प्रति भरोसा बढ़ा है।

पुसौर में आयोजित इस कार्यक्रम की खास बात यह रही कि यहां तकनीक का भी उपयोग किया गया। एलईडी स्क्रीन पर जागरूकता फिल्मों का प्रदर्शन कर साइबर ठगी, नशे के दुष्परिणाम और सामाजिक अपराधों के प्रति लोगों को जागरूक किया गया। इससे ग्रामीणों को सरल तरीके से गंभीर विषयों की जानकारी मिली।
साइबर अपराध के बढ़ते मामलों को देखते हुए एसएसपी सिंह ने इसे सबसे बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि अनजान कॉल, फर्जी लिंक और लालच भरे निवेश प्रस्ताव आज ठगी के प्रमुख हथियार बन चुके हैं। ऐसे मामलों में सतर्कता और त्वरित सूचना ही बचाव का सबसे कारगर उपाय है।

कार्यक्रम में बीट सिस्टम को भी प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। प्रत्येक गांव में नियुक्त बीट आरक्षक को सीधे नागरिकों से जोड़कर छोटी-छोटी समस्याओं का स्थानीय स्तर पर समाधान किया जा रहा है। इससे न केवल शिकायतों का तेजी से निराकरण हो रहा है, बल्कि पुलिस की पहुंच भी गांव-गांव तक मजबूत हुई है।
नशा मुक्ति को लेकर पुलिस की सख्ती का भी जिक्र किया गया। ऑपरेशन आघात के तहत लगातार कार्रवाई करते हुए अवैध शराब पर अंकुश लगाने का प्रयास जारी है। पुलिस ने साफ किया कि सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी और इसमें समाज की भागीदारी जरूरी है।
वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान और सुरक्षा को लेकर भी कार्यक्रम में विशेष संदेश दिया गया। एसएसपी ने कहा कि वर्तमान कानून बुजुर्गों के अधिकारों की रक्षा करता है और उनकी उपेक्षा करने वालों पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है।
हेलो सिस्टर


यातायात सुरक्षा और महिला सुरक्षा जैसे विषयों पर भी विस्तार से जानकारी दी गई। महिला सुरक्षा के तहत हेलो सिस्टर हेल्पलाइन की जानकारी देते हुए बताया गया कि किसी भी आपात स्थिति में महिलाएं तुरंत सहायता प्राप्त कर सकती हैं।
कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों स्थानीय नागरिकों और पुलिस अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी ने यह संकेत दिया कि सामुदायिक पुलिसिंग के जरिए कानून व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा और जागरूकता दोनों को नई दिशा देने वाली साबित हो रही है।
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