रेत के खेल में कौन-कौन हैं शामिल
न्यायधानी में रेत का खेल आज का नहीं, बरसों बरस से चल रहा है। कहावत है ना, जिसकी लाठी उसकी भैंस, बस वैसा ही गोरखधंधा यहां चल रहा है। सिस्टम है तो, पर कहां है और किस हालात में है, किसी को ना तो समझ में आ रहा है और ना ही कोई समझ पा रहा है। अरपा से लेकर शिवनाथ और खारुन किसी भी नदी के हिस्से में चले जाइए, आपको नदी के भीतर गहरे और जानलेवा गड्ढा नजर आ ही जाएगा। ये गड्ढे बयान करते हैं, सिस्टम कहां है, और माफियाओं की दबंगाई किस हद तक है। तभी तो आसपास के गांव भी भय खाते हैं। इनकी दबंगाई ऐसी कि दिन हो या रात, ट्रैक्टर से लेकर भारी वाहनों की आमद रफ्त जारी है। ना कोई टोकने वाला और ना ही कोई रोकने वाला। इसके पीछे कारण क्या है, यह आप भी अच्छी तरह जानते और समझते हैं।
रेत के खेल में चढ़ गई बलि, सवाल ये और कितने की
रेत के खेल में माफियाओं का दिन दोगुनी और रात चौगुनी बल्ले-बल्ले हो रही है। परेशान हो रहे हैं आसपास के ग्रामीण और राहगीर। नदियों के गहरे गड्ढे, रास्ते में धूल की उड़ती मोटी परतें और आसमान में जहर घोलती हवाओं का क्या। इससे किसका वास्ता है। इसके लिए सिस्टम है, विभाग भी बना हुआ है, मोटी तनख्वाह भी सरकार दे रही है। पर ये हैं कहां, अगरये होते तो नदियों में गहरे गड्ढे नहीं होते, रास्तों में मोटी धूल की परत आसमान की ओर जाते दिखाई नहीं देती और तो और बच्चों से लेकर बुजुर्ग और महिलाएं श्वांस दमा से त्रस्त नहीं होते। इसे छोड़िए इस धंधे में तो अब नाबालिगों को भी झोक दिया गया है, तभी तो आज एक नाबालिग की बड़ी चढ़ गई है। सवाल ये कि और कितनों की बलि चढ़ेगी।
त्रिनेत्र, कलेक्टर, एसएसपी और शहरवासी
इन दिनों शहर में त्रिनेत्र की खूब चर्चा हो रही है। कलेक्टर व एसएसपी के इस अभियान की सर्वत्र चर्चा और प्रशंसा भी होने लगी है। आला अधिकारियों ने जिस गंभीरता के साथ शहरवासियों और व्यवसायियों की चिंता करनी शुरू की है, इसके लिए साधुवाद तो बनता ही है। त्रिनेत्र के जरिए शहर के चप्पे-चप्पे पर पुलिस नजर रखेगी। किसी तरह के अपराध होने की स्थिति में अपराधियों तक पहुंचने और उसे दबोचने में समय नहीं लगेगा। शहरवासियों की चिंता अगर आला अधिकारी कर रहे हैं और तो इस अभियान की सफलता तय मानकर चलिए। त्रिनेत्र के जरिए शहर के हर एक कोना सीसीटीवी के जद में रहेगा। अगर ऐसा हुआ तो निश्चित मानकर चलिए हमारी सुरक्षा घेरा और भी मजबूत होगी। इस अभियान की सफलता के लिए जिले के दोनों आला अफसर और इसमें सहयोगी की भूमिका निभाने वालों को अभियान के सफलता की अग्रिम बधाई तो बनती है। भरोसा करते हैं अभियान सफल हो और हमारा और आप सबका का सुरक्षा घेरा भी उतना ही मजबूत हो।
पुलिस सिस्टम में बड़ा बदलाव, नवाचार की होने लगी चर्चा
बिलासपुर जिले के एसएसपी रजनेश सिंह ने टीआई व पुलिस कर्मियों का तबादला आदेश जारी किया है। आपको भी मीडिया के माध्यम से जानकारी लग ही गई होगी। आपने इसे किस अंदाज से देखा और कैसे पढ़ा। यह तबादला आदेश कई मायने में बेहद खास और अपने आप में तो अलग ही है। हमने जो देखा है,उसे आपके सामने रखते हैं, अब CSP-SDOP ऑफिस में टीआई की तैनाती कर दी गई है। इसके मायने क्या हैं। इन दोनों महत्वपूर्ण विभाग में अनुभवी इंस्पेक्टरों की तैनाती से विभागीय कामकाज और फिल्ड वर्क दोनों व्यवस्थाएं दुरुस्त होंगी। बिलासपुर जिले में ऐसा पहली बार हूआ है। यह सफल रहा तो बतौर रोल मॉडल छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों में यह देखने को मिले तो अचरज की बात नहीं होनी चाहिए। वैसे भी जिले के कप्तान नवाचार के लिए छत्तीसगढ़ में अपना नाम कमा रहे हैं।
अटकलबाजी
पुलिस विभाग में रिफार्म के बाद कहीं खुशी और कहीं गम का माहौल है। रिफार्म के बाद किसने कितनी मिठाइयां बांटी जरा पता लगाइए, कौन गमजदा है,ये भी देखिए।
प्रदेश के साथ ही जिले में राजस्व पखवाड़ा का दौर चल रहा है। एक पटवारी विधायक के गुस्से का शिकार हो गया है, पखवाड़े में और किन-किन राजस्व अमला नेताजी लोगों का शिकार बनेंगे। हिट लिस्ट भी तैयार हो रही है।
प्रधान संपादक


