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March 25, 2026 7:43 pm

4 साल की बच्ची को जेल भेजे जाने की खबर पूर्णत: भ्रामक -एसएसपी शशि मोहन सिंह

“एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कहा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है ,बिना तथ्यों की पुष्टि किए इस प्रकार की खबरें प्रसारित करना न केवल कानूनन गलत है, बल्कि इससे समाज में भ्रम, भय और अविश्वास का माहौल बनता है,डिजिटल प्लेटफार्म, फेसबुक पेज, वेब पोर्टल एवं इंस्टाग्राम अकाउंट संचालकों को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू”

रायगढ़, 25 मार्च।ग्राम गेजामुडा की एक घटना को लेकर सोशल मीडिया, कुछ वेब पोर्टलों तथा फेसबुक-इंस्टाग्राम पेजों पर 4 साल की बच्ची को जेल भेजा गया शीर्षक से प्रसारित खबर को जिला पुलिस ने सिरे से खारिज किया है। रायगढ़ एसएसपी आईपीएस शशि मोहन सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह खबर पूरी तरह भ्रामक, तथ्यहीन और समाज में भ्रम फैलाने वाली है। उन्होंने दोहराया कि इस पूरे प्रकरण में किसी भी नाबालिग के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

एसएसपी श्री सिंह ने विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि घटना की वास्तविक पृष्ठभूमि 05 फरवरी 2026 की है, जब ग्राम गेजामुडा में राजस्व विभाग द्वारा सीमांकन की कार्रवाई की जा रही थी। इसी दौरान कुछ अज्ञात व्यक्तियों ने शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न की। इस पर थाना कोतरारोड़ में अपराध क्रमांक 38/2026 धारा 132 एवं 221 भारतीय न्याय संहिता के तहत मामला दर्ज किया गया।

उन्होंने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत विवेचना की गई, जिसमें चार आरोपियों की पहचान सुनिश्चित की गई। इसके बाद 22 मार्च 2026 को विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत संबंधित आरोपियों की गिरफ्तारी की गई। यह कार्रवाई पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप और साक्ष्यों के आधार पर की गई।

गिरफ्तारी के बाद क्षेत्र में कुछ ग्रामीणों द्वारा विरोध प्रदर्शन किया गया, जिससे कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका उत्पन्न हो गई। इस पर पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर पहले समझाइश दी और स्थिति को शांतिपूर्ण ढंग से नियंत्रित करने का प्रयास किया। हमारी प्राथमिकता हमेशा संवाद और शांति बनाए रखना होती है।

हालांकि, समझाइश के बावजूद कुछ लोगों द्वारा शांति व्यवस्था भंग करने की स्थिति बनने पर कोतरारोड़ पुलिस ने 4 वयस्क महिलाओं एवं 4 पुरुषों के विरुद्ध भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 170/126, 135(3) (पूर्व में CrPC की धारा 151) के तहत वैधानिक कार्रवाई की। सभी को उर्दना पुलिस लाइन लाया गया, जहां एसडीएम रायगढ़ द्वारा महिलाओं को मौके से ही मुचलके पर रिहा कर दिया गया।

एसएसपी ने स्पष्ट किया कि पूरे घटनाक्रम में कहीं भी किसी नाबालिग को हिरासत में लेने, गिरफ्तार करने या जेल भेजने जैसी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। सोशल मीडिया पर चल रही खबरें पूरी तरह निराधार हैं।

सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि कुछ प्लेटफार्मों द्वारा नाबालिग बच्चों के फोटो और वीडियो बिना ब्लर किए प्रसारित किए गए हैं, जो विधि का उल्लंघन होने के साथ-साथ अत्यंत संवेदनशील और आपत्तिजनक कृत्य है। इस संबंध में संबंधित डिजिटल प्लेटफार्म, फेसबुक पेज, वेब पोर्टल एवं इंस्टाग्राम अकाउंट संचालकों को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

श्री सिंह ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। बिना तथ्यों की पुष्टि किए इस प्रकार की खबरें प्रसारित करना न केवल कानूनन गलत है, बल्कि इससे समाज में भ्रम, भय और अविश्वास का माहौल बनता है।

एसएसपी रायगढ़ ने सभी मीडिया संस्थानों, पत्रकारों एवं डिजिटल कंटेंट निर्माताओं से अपील की कि वे सकारात्मक और जिम्मेदार पत्रकारिता का पालन करें। तथ्यों की पुष्टि, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी-ये तीनों पत्रकारिता के मूल स्तंभ हैं। सही और संतुलित खबरें ही समाज को दिशा देती हैं।

जिला पुलिस रायगढ़ ने भी पुनः स्पष्ट किया है कि इस मामले में किसी भी नाबालिग के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की गई है और भ्रामक खबर फैलाने वालों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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