
“एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कहा कि अवैध मादक पदार्थों की खेती गंभीर अपराध है और इसमें संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की है कि ऐसी किसी भी गतिविधि की सूचना तुरंत प्रशासन या पुलिस को दें, ताकि समय रहते सख्त कार्रवाई की जा सके”
छत्तीसगढ़ ।मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार रायगढ़ जिले में अवैध मादक पदार्थों की खेती के खिलाफ जिला प्रशासन द्वारा लगातार कार्रवाई जारी है। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशिमोहन सिंह के नेतृत्व में जिले में चलाए जा रहे अभियान के तहत बीते 72 घंटे में तमनार क्षेत्र के आमाघाट से लेकर लैलूंगा विकासखंड के ग्राम-नवीन घटगांव और मुड़ागांव तक अवैध मादक पदार्थ अफीम के खिलाफ कार्रवाई की गई, जिससे इस कार्य में जुडे़ संलिप्त लोगों में हड़कंप मच गया है।
जिले में अवैध मादक पदार्थों की खेती के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में इस बार ड्रोन तकनीक प्रशासन के लिए सबसे बड़ा हथियार साबित हुई है। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी और एसएसपी शशि मोहन सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि पिछले 72 घंटे में ड्रोन सर्वे और सघन जांच के जरिए तीन बड़ी कार्रवाई करते हुए अफीम खेती के एक व्यापक नेटवर्क का खुलासा किया गया है।
प्रशासन के अनुसार, आधुनिक तकनीक की मदद से अब ऐसे दुर्गम और वन क्षेत्रों में भी निगरानी संभव हो सकी है, जहां पारंपरिक तरीकों से पहुंचना कठिन था। ड्रोन से मिली सटीक जानकारी के आधार पर टीमों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अवैध फसलों को चिन्हित किया और मौके पर ही नष्ट किया।
19 मार्च को तमनार क्षेत्र के आमाघाट में की गई कार्रवाई में सब्जी की खेती की आड़ में उगाई जा रही अफीम की फसल का खुलासा हुआ। यहां से 60,326 पौधे बरामद किए गए, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 2 करोड़ रुपये बताई गई है। मामले में झारखंड निवासी मुख्य आरोपी मार्शल सांगा को गिरफ्तार किया गया है। प्रशासन ने मौके पर फसल को उखाड़कर जेसीबी और रोटावेटर से खेत को पूरी तरह नष्ट कर दिया।
इसके बाद 23 मार्च को ड्रोन एवं भौतिक सर्वे के दौरान लैलूंगा क्षेत्र के नवीन घटगांव में भी अवैध खेती पकड़ी गई। यहां सादराम नाग द्वारा साग-भाजी के बीच अफीम उगाई जा रही थी। पुलिस ने फसल जब्त कर आरोपी को गिरफ्तार किया। वहीं, अभिमन्यु नागवंशी के घर से अफीम की सूखी फसल बरामद की गई, जिसे साक्ष्य नष्ट करने से पहले ही जब्त कर लिया गया।
मुड़ागांव में भी ड्रोन सर्वे से मिले इनपुट के आधार पर कार्रवाई करते हुए तानसिंह नागवंशी से पूछताछ की गई, जिसमें संदिग्ध खेती के संकेत मिले हैं। उसके घर से पौधों के सूखे अवशेष जब्त कर फोरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं।
जिला प्रशासन ने बताया कि ड्रोन सर्वे अभियान के तहत खरसिया, घरघोड़ा, तमनार, लैलूंगा, मुकडेगा, रायगढ़, पुसौर और धरमजयगढ़ सहित कई अनुविभागों के दर्जनों गांवों में निगरानी की गई है। इस तकनीक के जरिए न सिर्फ संदिग्ध गतिविधियों की पहचान तेजी से हो रही है, बल्कि कार्रवाई भी अधिक प्रभावी और समयबद्ध बन रही है।
क्या कहा कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने
रायगढ़ कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने कहा कि आधुनिक तकनीक का उपयोग कर अवैध गतिविधियों पर सख्ती से नियंत्रण किया जा रहा है। कलेक्टर ने बताया कि पिछले एक से डेढ़ सप्ताह से जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों का गहन विश्लेषण और सर्वे किया जा रहा है। इस दौरान अफीम की खेती के दो मामले सामने आए थे। वहीं, आज दोपहर तीसरा मामला भी प्रकाश में आया है। उन्होंने बताया कि सभी मामलों में संबंधित धाराओं के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि मादक पदार्थों की अवैध खेती कानूनन गंभीर अपराध है। इसमें संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। आगे भी ड्रोन सर्वे, सघन जांच एवं संयुक्त कार्रवाई इसी तरह लगातार जारी रहेगी।
वहीं एसएसपी शशि मोहन सिंह ने स्पष्ट किया कि मादक पदार्थों की अवैध खेती में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सिंह ने बताया कि बीते 19 मार्च को मुखबिर से मिली पुख्ता सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने तमनार क्षेत्र के आमाघाट में छापेमारी की। जांच के दौरान पाया गया कि यहां सब्जी की खेती की आड़ में अवैध रूप से अफीम की खेती की जा रही थी। कार्रवाई के दौरान लगभग 60,326 पौधे बरामद किए गए, जिनका अनुमानित बाजार मूल्य करीब 2 करोड़ रुपये आंका गया है। इस मामले में झारखंड निवासी मुख्य आरोपी मार्शल सांगा को हिरासत में लेकर विवेचना की जा रही है। मौके पर पूरी फसल को उखाड़कर जब्त किया गया तथा रोटावेटर और जेसीबी मशीन की सहायता से खेत को पूरी तरह नष्ट कर समतल किया गया। इस कार्रवाई में पुलिस, प्रशासन, कृषि, आबकारी एवं एफएसएल की टीम संयुक्त रूप से उपस्थित रही। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की है कि ऐसी किसी भी गतिविधि की सूचना तुरंत प्रशासन या पुलिस को दें, ताकि समय रहते सख्त कार्रवाई की जा सके,ताकि तकनीक और जनसहयोग के माध्यम से जिले को नशामुक्त बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकें।
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