छत्तीसगढ़। दुर्ग जिले के भाजपा नेता विनायक ताम्रकार, जिन्हें प्रदेश भाजपा ने किसान मोर्चा में अहम जिम्मेदारी देते हुए प्रदेश संयोजक राइस मिल प्रसंस्करण प्रकल्प किसान मोर्चा बनाया था, अफीम की खेती करते रंगेहाथों पकड़ा गया है। अफीम की खेती और भाजपा नेता का नाम सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति में एक तरह से उबाल सा आ गया है। मामला गहराते देख प्रदेश भाजपा ने विनायक ताम्रकार को निलंबित कर दिया है।

प्रदेश महामंत्री मुख्यालय डा नवीन मारकंडेय के हस्ताक्षर से जारी निलंबन पत्र में लिखा है, आपके कृत्य से भाजपा की छवि धूमिल हुई है। प्रदेश अध्यक्ष के निर्देश पर भाजपा नेता को निलंबित कर दिया गया है। सवाल यह उठ रहा है, निलंबन से भाजपा की छवि कितनी सुधरी और दागदार छवि क्या दागी नेता को पार्टी से निकाल देने से एकदम स्वच्छ हो गई। अफीम की खेती करने का मामला सामने आने के बाद प्रदेश की सियासत में हलचल तब मची और गहरी हुई जब पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल मौके पर पहुंच गए। उनका मौके पर पहुंचना था, प्रदेश की सियासत में भी उसी अंदाज में उबाल आ गया है। बयानबाजी भी उसी अंदाज में सत्ता और विपक्ष की तरफ से होने लगी है।
कानून पर गौर करें तो, अफीम की खेती पूरी तरह गैरकानूनी है। यह सब जानते हुए भी भाजपा नेता ने प्रदेश में पार्टी के सरकार होने के दम पर ही इस तरह के गैरकानूनी काम करने की हिम्मत जुटाई। यह मामला सामने आने के बाद भाजपा की छवि में जो बट्टा लगा है उसे सुधारने में बरसों बरस लग जाएंगे। मामला संगीन है और पार्टी पदाधिकारी की सीधे संलिप्तता के चलते यह और भी गंभीर हो गया है। संगठन के शीर्ष नेतृत्व से लेकर जुड़े नेता भी इसे अच्छा नहीं मान रहे हैं। प्रदेश भाजपा के एक दिग्गज नेता ने कहा, यह मामला राजनीतिक ओर संगठन के नजरिए से बेहद गंभीर है।
इधर सोशल मीडिया पर राज्य के कुछ मंत्रियों और पार्टी पदाधिकारियों के साथ संबंधित भाजपा नेता की कई तस्वीरें भी वायरल हो रही हैं, जिसके बाद विपक्ष को सरकार और संगठन दोनों को घेरने का मौका मिल गया है। विपक्ष का आरोप है कि सत्ता की आड़ लेकर कुछ लोग अपने निजी हित साधने में लगे हुए हैं, जबकि पार्टी के नीति-निर्धारक जमीनी हकीकत जाने बिना ही पदों का वितरण कर रहे हैं।
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि पार्टी में लंबे समय से सक्रिय जमीनी कार्यकर्ताओं की तुलना में नेतृत्व के आसपास रहने वाले लोगों को अधिक महत्व मिलने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। इस घटना ने संगठनात्मक व्यवस्था और पद वितरण की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में नशे के बढ़ते प्रचलन को लेकर पहले से ही चिंता जताई जाती रही है। पुलिस की लगातार कार्रवाई के बावजूद नशे के अवैध कारोबार पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पाया है। ऐसे में सत्तारूढ़ दल के एक नेता का नाम नशे से जुड़ी खेती के मामले में सामने आने से राजनीतिक माहौल और गरमा गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मामला प्रदेश की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है और विपक्ष इसे सरकार को घेरने के लिए प्रमुख मुद्दे के रूप में उठा सकता है।

बता दें कि विधानसभा का बजट सत्र चल रहा है। भाजपा नेता द्वारा अफीम की खेती का मसला विधानसभा में भी जोरशोर से उछलेगगा। विपक्षी सदस्यों द्वारा भाजपा को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश भी होगी।
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