साय मंत्रिमंडल में रिसफल की तैयारी तो नहीं
भाजपा ने राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार की घोषणा कर दी है। लक्ष्मी वर्मा को प्रत्याशी बनाया है। जातिगत समीकरण पर नजर डालें तो भाजपा आलाकमान ने ओबीसी वर्ग पर एक बार फिर बड़ा दांव खेला है। सियासी गीलियारे में इस बात की भी चर्चा छिड़ी हुई है, आलाकमान और रणनीतिकारों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पसंद पर मुहर लगाई है, ऐसा भी कह सकते हैं, सीएम की पंसद को सियासत में एक बार फिर तव्वजो मिली है। राज्यसभा की उम्मीदवारी के बहाने कहीं एक तीर से कई निशाने साधने की कवायद तो शुरू नहीं हो रही है। आदिवासी मुख्यमंत्री,ओबीसी डिप्टी सीएम, ओबीसी राज्यसभा सदस्य। मंत्रिमंडल से लेकर दिल्ली की राजनीति तक छत्तीसगढ़ भाजपा की सियासत में एसटी और ओबीसी की पूरी धमक दिखाई देने लगी है। बात एक तीर से कई निशाना साधने की है तो, प्रदेश के रणनीतिकारों और दिल्ली का फ्यूचर प्लान साय मंत्रिमंडल मे रिसफल को तो नहीं है। अगर ऐसा हुआ कौन बाहर होंगे और किसकी इंट्री होगी इसे लेकर भी सुगबुगाहट सुनाई देने लगी है। बहरहाल दिल्ली अभी दूर है। इन दिनों भाजपा में जो कुछ घट रहा है और जो हो रहा है, दिल्ली को भी दूर नहीं कहा जा सकता।
यहां तो गजब हो रहा है, सरकारी खजाने को लुटने की ऐसी साजिश
शिक्षा विभाग, अब आपके जेहन में क्या आया। वहीं जो हम सोच रहें है या फिर इससे इतर। शिक्षा विभाग का नाम जेहन में आते ही संस्कार ओर करियर की बात झट सामने आ जाती है। बच्चों में अच्छे संस्कार देना और भविष्य गढ़ने वाली संस्था का नाम ही तो शिक्षा विभाग है। समय के साथ यह लोगो भी अब बदलने लगा है। अब तो करप्शन और फोरजरी ही सब-कुछ हो गया है। खंड शिक्षा कार्यालय कोटा में जो कुछ घटा और अब भी घट रहा है,वाकई चिंता की बात है। शिक्षा विभाग जैसे संस्थान में फर्जीवाड़ा,रिश्वतखोरी और कमीशनखोरी की बात अजीब सा लगता है। पर यह तो सौ फीसदी सच है। कोटा ब्लॉक में जो कुछ हो रहा है,अफसरों को दागदार कर दिया है। फर्जीवाड़े की ऐसी कल्पना तो कम से कम शिक्षा विभाग से नहीं की जा सकती। पर यहां हुआ है और जमकर हुआ है। अब तो जेल ही विकल्प बच गया है। चार नाम तो पक्का है। चर्चा तो यह भी हो रहा है, सियासत कहीं आड़े ना आ जाए और पहुंच कहीं रोड़ा ना अटका दे। बहरहाल एफआईआर तो हो ही गया है।
मस्तूरी के बाद कोटा, इसके बाद कहां
बात शिक्षा विभाग की चल ही पड़ी है तो थोड़ा पीछे चलते हैं। मस्तूरी खंड शिक्षा कार्यालय। यहां जो कुछ हुआ था, वह तो अवाक कर देने वाला था। मेडिकल बिल पास करने के एवज में लाखों का खेल करने की तैयारी जो थी। परेशान शिक्षक का बिल पास करने के एवज में घूसखोर बाबू ने लाखों रुपये मांगे। डिमांड ही नहीं किया, बात यहां तक बताई कि घूसखोरी की राशि कहां-कहां तक बटेगी। सिस्टम ही ऐसा बना हुआ है, ब्लाक से लेकर जिले तक। सबको कमीशन। जितना बड़ा ओहदा और जितनी बड़ी कुर्सी, घूसखोरी का कमीशन भी उतनी मोटी। बातचीत का आडियो वायरल हुआ और घूसखोर बाबू का तबादला। पर यह क्या, कुछ ही दिनों बाद दोबारा मस्तूरी बीईओ कार्यालय में फिर नजर आने लगे। डीईओ की मासूमियत देखिए, कोई और जाना नहीं चाहता था,इसलिए उनको ही भेजना पड़ा। मतलब समझ रहे हैं, सरपस्ती में ही सबकुछ चल रहा है। घूसखोरी हो या फिर बिल पास करने के एवज में मांगी जाने वाली रिश्वत। सब में बराबर की हिस्सेदारी।
होली में शांति व्यवस्था, शाबासी तो बनती है
होली त्योहार के पहले और त्योहार के दौरान शांति व्यवस्था कायम रही। हाईटैक सिस्टम से लैस पुलिस के अफसर और जवानों ने वाकई बड़ा काम किया है। पूरे समय पुलिस की मुस्तैदी नजर आई। सायरन बजाते पुलिस की गाड़ी और मोहल्लों में शांति के साथ होली मनाते मोहल्लेवासी। ना कहीं हुल्लड़ और ना ही कहीं ऐसी बात जिससे मन खराब हो जाए। पुलिस की व्यवस्था ऐसी, बदमाशों को दो दिन पहले ही हवालात के हवाले कर दिया था। मोहल्लों के छटे बंदमाश अंदर तो फिर गड़बड़ी का सवाल ही नहीं उड़ता। पुलिस की इस मुस्तैदी और मशक्कत को लेकर शाबासी तो बनती है।
अटकलबाजी
भाजपा ने राज्यसभा की टिकट फाइनल कर दी है। लक्ष्मी वर्मा जल्द राज्यसभा सदस्य बन जाएंगी। भाजपा ने एक बार फिर ओबीसी कार्ड खेला है। ओबीसी कार्ड के बहाने मंत्रिमंडल में रिसफल की तैयारी तो नहीं। किसकी छुट्टी होगी और कौन एंट्री मारेंगे।
शहर में इन दिनों खूब चर्चा हो रही है, भाजपा पार्षद के हत्या की सुपारी और ज्वेलर्स को लुटने की साजिश शहर के एक नामचीन क्लब में रची गई। कौन सा क्लब है और किसकी अनुमति से अपराधी क्लब पहुंचे और गहरी साजिश रच डाली।
प्रधान संपादक


