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May 18, 2026 11:39 am

मेडिकल पीजी सीट लेने के दिए थे 56 लाख, डॉक्टर को हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली

बिलासपुर। जस्टिस संजय एस. अग्रवाल और जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की डिवीजन बेंच ने कहा है कि यदि कोई व्यक्ति किसी अवैध कार्य या सार्वजनिक नीति के विरुद्ध समझौते के लिए पैसे का लेन-देन करता है, तो वह बाद में उस राशि की वसूली के लिए कानूनी सहायता नहीं मांग सकता। हाई कोर्ट ने बिलासपुर की निचली अदालत के फैसले को रद्द कर दिया है। अदालत ने डॉक्टर के पक्ष में 56 लाख लौटाने को कहा था।

बिलासपुर निवासी डॉ. केके. अग्रवाल का आरोप है कि मनेंद्रगढ़ निवासी नयन दत्ता ने खुद को मुख्यमंत्री का करीबी बताया और उनके बेटे का कोलकाता के सरकारी मेडिकल कॉलेज में पीजी में प्रवेश करा देगा। बेटे का एडमिशन नहीं होने पर डॉक्टर ने बिलासपुर के कोर्ट में सिविल सूट पेश किया। कोर्ट ने 20 अक्टूबर 2023 को दत्ता को 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ 56 लाख रुपए लौटाने का आदेश दिया था। हाई कोर्ट ने कहा कि मामला एक अवैध उद्देश्य’ पर आधारित था। डॉक्टर और दत्ता जानते थे कि सरकारी कॉलेज में इस तरह से एडमिशन कराना कानून सम्मत नहीं है। इस वजह से दोनों बराबर दोषी हैं।
हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न मामलों का हवाला देते हुए कहा कि अदालतें उन लोगों की सहायता नहीं करतीं जो गंदे हाथों के साथ न्याय मांगने आते हैं। जब पैसा देने वाले को पता था कि उद्देश्य अवैध है, तो वह अनुबंध अधिनियम की धारा 65 का लाभ भी नहीं उठा सकता।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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