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January 26, 2026 11:12 pm

एसएसपी रजनेश सिंह ने कहा नौनिहालों की बचेगी जान, केंद्र सरकार ने आन लाइन गेम्स पर प्रतिबंध लगाने लोकसभा में पेश किया विधेयक

जिले में भी हो चुकी है फ्री फायर गेम खेलने को लेकर हादसा,पहले दिमागी हालत बिगड़ी फिर युवक ने कर ली आत्महत्या

बिल के मुताबिक 3 साल तक की कैद या 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना या दोनों ,विज्ञापन में शामिल होने वाले व्यक्ति को 2 साल सजा या 50 लाख रुपये तक के जुर्माने या दोनों से दंडित करने का प्रावधान

बिलासपुर।आनलाइन मनी गेम्स पर प्रतिबंध लगाने के लिए केंद्र सरकार ने लोकसभा में बिल पेश किया है। इससे युवाओं के अलावा आनलाइन गेम खेलने वाले बच्चों की जानमाल की सुरक्षा होगी।ऐसा मानना है जिले के कप्तान रजनेश सिंह का।

केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा में पेश किए गए बिल के मद्देनजर बिलासपुर जिले के एसएसपी रजनेश सिंह ने बताया कि बेलगहना पुलिस चौकी के अंतर्गत ऐसी ही एक घटना का जिक्र उन्होंने किया है जिसमें उन्होंने बताया कि उन्होंने 11/09/ 2024 को मृतक गुम हुआ था ,जिस पर 12/09/24 को धारा 363 ipc कायम किया गया था। 13/09/24 को उसका बॉडी मिला था, परिजन ने फ्री फायर गेम खेलने से दिमागी हालात ठीक नही होने से फांसी लगाकर आत्महत्या करना बताये ।जिस पर प्रकरण में खात्मा तैयार किया गया। diary cctns एंट्री के लिए थाना कोटा भेज दिया गया है।इस घटना का जिक्र करने के पीछे का उद्देश्य यही कि अब ना किसी माता पिता का लाड़ला इसका शिकार होकर अपनी जान नहीं गंवाएगा। आनलाइन गेम के चलते कई परिवार तबाह हो चुका है। अब इस तरह की घटनाओं पर सीधेतौर पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने लोकसभा में बिल लाया है।

केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में आनलाइन गेमिंग संवर्धन एवं विनियमन विधेयक, 2025 पेश किया,। विधेयक का उद्देश्य ‘ऑनलाइन मनी गेम्स’ और उससे संबंधित बैंक सेवाओं, विज्ञापनों आदि की पेशकश पर बैन लगाना है।
ऑनलाइन मनी गेमिंग सेवा’ का मतलब किसी व्यक्ति द्वारा ऑनलाइन मनी गेम में प्रवेश करने या खेलने के लिए दी जाने वाली सेवा होगी। कोई भी व्यक्ति जो प्रस्तावित कानून का उल्लंघन करते हुए ऐसी सेवा प्रदान करता है, उसे 3 साल तक की कैद या 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकता है। इसके विज्ञापन में शामिल होने वाले व्यक्ति को 2 साल सजा या 50 लाख रुपये तक के जुर्माने या दोनों से दंडित किया जा सकता है।


सरकार को अधिकृत अधिकारियों को व्यापक जांच शक्तियां प्रदान करने का अधिकार देता है। जिसमें बिना वारंट के गिरफ्तारी और संपत्ति की तलाशी शामिल है। यदि अपराध होने या होने का ‘उचित संदेह’ हो। विधेयक में कहा गया है, “धारा 5, धारा 6 और धारा 7 के प्रावधानों का पालन न करने की स्थिति में, इस अधिनियम या सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69 ए में निहित किसी भी बात के बावजूद, ऑनलाइन मनी गेमिंग सेवा से संबंधित किसी भी कंप्यूटर संसाधन में उत्पन्न, प्रेषित, प्राप्त या होस्ट की गई कोई भी जानकारी उस अधिनियम में दिए गए प्रावधान के अनुसार जनता की पहुंच से अवरुद्ध की जा सकेगी।

देश से बाहर संचालित सेवाओं पर लागू होगा कानून

प्रस्तावित कानून न केवल के भीतर प्रदान की जाने वाली ऑनलाइन मनी गेमिंग सेवाओं पर लागू होगा, बल्कि विदेश से संचालित सेवाओं पर भी लागू होगा। विधेयक में ‘ई-स्पोर्ट्स’ को प्रतिबंध के दायरे से बाहर रखा है, जिन्हें केंद्र सरकार द्वारा भारत में खेल के एक वैध रूप के रूप में, आवश्यकतानुसार, मान्यता और प्रोत्साहन दिया जा सकता है। ई-स्पोर्ट्स के साथ-साथ, सरकार शैक्षिक और मनोरंजक उद्देश्यों के लिए ‘ऑनलाइन सोशल गेम्स’ को भी बढ़ावा देने और मान्यता देने पर विचार कर सकती है, जिसमें प्रवेश के लिए सदस्यता शुल्क शामिल हो सकता है, लेकिन दांव या फिर सट्टेबाजी जैसी कोई चीज़ नहीं।
विधेयक में कहा गया है, “ये प्लेटफ़ॉर्म अक्सर बाध्यकारी और व्यसनकारी व्यवहार को बढ़ावा देते हैं, जिसके परिणामस्वरूप वित्तीय बर्बादी, मानसिक स्वास्थ्य विकार और धोखाधड़ी व शोषण की घटनाओं में वृद्धि होती है।” साथ ही, युवा और आर्थिक रूप से कमज़ोर लोगों पर, विशेष रूप से सेलिब्रिटी विज्ञापनों की पृष्ठभूमि में, ऐसे खेलों के प्रतिकूल प्रभाव पर प्रकाश डाला गया है। विधेयक में कहा गया है, “कुछ मामलों में, इन प्लेटफार्मों को धन शोधन, वित्तीय धोखाधड़ी, आतंकवाद के वित्तपोषण और आतंकवादियों व आतंकवादी संगठनों के लिए संदेशवाहक के रूप में उपयोग जैसी अवैध गतिविधियों से जोड़ा गया है, जिससे राज्य की सुरक्षा और संप्रभुता प्रभावित होती है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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