क्रांतिनगर सहित तीनों जैन मंदिरों में अभिषेक, शांतिधारा व पूजन
CBN 36 बिलासपुर। आत्मशुद्धि और आत्मकल्याण का दस दिवसीय दसलक्षण महापर्व बुधवार से श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ शुरू हुआ। समाधिस्थ आचार्य श्री विद्यासागर महाराज एवं आचार्य श्री समय सागर महाराज की शिष्या आर्यिका श्री 105 अकम्पमति माताजी एवं आर्यिका श्री 105 अचलमति माताजी के सानिध्य में 1008 श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, क्रांतिनगर में मुख्य आयोजन किया जा रहा है। क्रांतिनगर, सरकंडा और सन्मति विहार मंगला स्थित जैन मंदिरों में मंगलाष्टक, अभिषेक, शांतिधारा और पूजन संपन्न हुआ।
जैन सभा अध्यक्ष दीपक जैन ने बताया कि सुबह मंगलाष्टक, अभिषेक व शांतिधारा के बाद पूजन और माताजी के प्रवचन हुए। इसके बाद तत्त्वार्थ सूत्र का वाचन किया गया। अभिषेक एवं शांतिधारा के पात्रों का चयन बोलियों के माध्यम से किया गया।
उत्तम क्षमा का संदेश
दसलक्षण महापर्व के प्रथम दिन उत्तम क्षमा धर्म पर प्रवचन देते हुए माताजी ने कहा कि क्रोध एक ऐसी कषाय है, जो व्यक्ति को उसकी स्थिति से विचलित कर देती है। क्रोध के आवेग में व्यक्ति हित-अहित का विवेक खो देता है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार लकड़ी में लगी आग दूसरों को जलाने के साथ स्वयं लकड़ी को भी जला देती है, उसी प्रकार क्रोध व्यक्ति को भी नुकसान पहुंचाता है। क्रोध कषाय को समझकर उस पर विजय प्राप्त करना ही क्षमा धर्म है।इस अवसर पर समाज की महिलाओं ने तत्त्वार्थ सूत्र का वाचन किया।
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