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October 20, 2026 1:53 am

साहित्य से दूर हो सकती है समाज की विचार-शून्यता : डॉ. उपेंद्र कोठेकर

CBN36 वर्धा। विदर्भ साहित्य संघ, वर्धा शाखा की ओर से आयोजित साहित्य रसिक सम्मेलन में वरिष्ठ कवि-गीतकार एवं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. उपेंद्र कोठेकर ने कहा कि समाज में बढ़ती विचार-शून्यता चिंता का विषय है। इसे दूर करने में साहित्य और साहित्यिक आंदोलनों की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन विचारहीनता समाज के लिए घातक है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता विदर्भ साहित्य संघ के पूर्व अध्यक्ष प्रदीप दाते ने की। सुविख्यात कवि एवं साहित्यकार श्याम माधव धोंड और डॉ. गजानन कोटेवार प्रमुख अतिथि के रूप में मौजूद रहे।

डॉ. कोठेकर ने कहा कि नई पीढ़ी तकनीकी माध्यमों के जरिए अपनी अभिव्यक्ति कर रही है। ऐसे में समय के अनुरूप साहित्य सृजन और साहित्यिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि साहित्य समाज को दिशा देने और चिंतन को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम है।

श्याम माधव धोंड ने साहित्य के क्षेत्र में युवाओं को अधिक अवसर देने पर जोर दिया। डॉ. गजानन कोटेवार ने सशक्त समाज के निर्माण के लिए पुस्तकालय व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता बताई। अध्यक्षीय संबोधन में प्रदीप दाते ने वर्धा की समृद्ध साहित्यिक परंपरा का उल्लेख करते हुए साहित्यिक संस्थाओं को समाज और शासन से सहयोग मिलने की अपेक्षा जताई।

कार्यक्रम का प्रास्ताविक विदर्भ साहित्य संघ, वर्धा शाखा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र मुंढे ने किया। इस दौरान अतिथियों का सम्मान किया गया और कवियों ने काव्य पाठ की प्रस्तुतियां दीं। सम्मेलन में जिलेभर से बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी शामिल हुए।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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