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August 31, 2026 7:20 pm

झीरम घाटी हत्याकांड: पांच सितंबर को आएगा एनआईए कोर्ट का फैसला

CBN36 जगदलपुर। बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सल हत्याकांड मामले में एनआईए की विशेष अदालत अब पांच सितंबर को फैसला सुनाएगी। मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद सोमवार, 31 अगस्त को फैसला आने की उम्मीद थी, लेकिन अदालत ने निर्णय की तारीख चार दिन आगे बढ़ा दी है। अदालत के फैसले पर बस्तर समेत पूरे प्रदेश की निगाहें टिकी हैं।

झीरम घाटी हत्याकांड में कुल 11 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई हुई थी। इनमें से एक आरोपी की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है। अब शेष 10 आरोपियों की कथित भूमिका को लेकर एनआईए की विशेष अदालत अपना फैसला सुनाएगी।

अभियोजन पक्ष ने मामले में अदालत के समक्ष 101 गवाहों के बयान दर्ज कराए हैं और बड़ी संख्या में दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए हैं। मामले में 10 अगस्त को अंतिम बहस पूरी हुई थी। इसके बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। रिजर्व फॉर ऑर्डर के बाद 31 अगस्त को फैसला आने की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन अब अदालत ने पांच सितंबर की तारीख तय की है।

परिवर्तन यात्रा के दौरान हुआ था हमला

झीरम घाटी की घटना 25 मई 2013 की है। उस समय छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव होने थे और भाजपा की सरकार थी। डॉ. रमन सिंह मुख्यमंत्री थे। चुनाव से पहले कांग्रेस ने प्रदेशभर में परिवर्तन यात्रा शुरू की थी। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के तत्कालीन अध्यक्ष नंदकुमार पटेल के नेतृत्व में कांग्रेस के बड़े नेता और कार्यकर्ता इस यात्रा के जरिए चुनावी माहौल तैयार कर रहे थे।

25 मई को सुकमा में परिवर्तन रैली आयोजित की गई थी। रैली के बाद कांग्रेस नेताओं का काफिला सुकमा से जगदलपुर के लिए रवाना हुआ। काफिले में करीब 25 वाहन और लगभग 200 नेता-कार्यकर्ता शामिल थे। काफिले में कांग्रेस की तत्कालीन शीर्ष प्रदेश नेतृत्व मौजूद था।

काफिले में सबसे आगे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल और कवासी लखमा की गाड़ियां थीं। इसके पीछे महेंद्र कर्मा और मलकीत सिंह गैंदू का वाहन था। बस्तर के कांग्रेस प्रभारी उदय मुदलियार भी काफिले में शामिल थे।

पेड़ गिराकर रोका रास्ता, फिर शुरू हुई गोलीबारी

दोपहर करीब 3:40 बजे कांग्रेस नेताओं का काफिला झीरम घाटी पहुंचा। इसी दौरान नक्सलियों ने पेड़ गिराकर सड़क को अवरुद्ध कर दिया। रास्ता बंद होने के कारण जैसे ही वाहनों का काफिला रुका, घात लगाए बैठे नक्सलियों ने हमला कर दिया।

बताया जाता है कि बड़ी संख्या में नक्सलियों ने काफिले पर फायरिंग शुरू कर दी। करीब डेढ़ घंटे तक झीरम घाटी में गोलियों की आवाज गूंजती रही। हमले के बाद नक्सली पहाड़ियों से नीचे उतरे और एक-एक वाहन की तलाशी लेने लगे।

महेंद्र कर्मा को बनाया निशाना

तलाशी के दौरान नक्सलियों को एक वाहन में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सलवा जुडूम आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल महेंद्र कर्मा मिले। सलवा जुडूम आंदोलन के कारण नक्सली उन्हें अपना प्रमुख दुश्मन मानते थे। नक्सलियों ने महेंद्र कर्मा की बेरहमी से हत्या कर दी। हमले में उन्हें कई गोलियां मारे जाने की बात सामने आई थी।

झीरम घाटी हमले में कांग्रेस की तत्कालीन प्रदेश नेतृत्व की कई प्रमुख हस्तियों समेत बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी। घटना को छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े राजनीतिक और नक्सली हमलों में गिना जाता है।

अब करीब 13 साल बाद मामले में एनआईए की विशेष अदालत का फैसला पांच सितंबर को आने वाला है। फैसले को लेकर पीड़ित परिवारों, राजनीतिक दलों और प्रदेशवासियों की नजर अदालत के निर्णय पर है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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