वारदात के बाद शव को सड़क तक घसीटकर दुर्घटना का रूप देने की कोशिश, 22 गवाहों और 101 साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने सुनाया फैसला

“वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रायगढ़ शशि मोहन सिंह ने जिले के सभी विवेचकों को गंभीर मामलों की वैज्ञानिक एवं तथ्यपरक विवेचना करने के निर्देश दिए हैं, ताकि न्यायालय में सशक्त साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों को कठोर दंड दिलाया जा सके”
CBN36 रायगढ़। तमनार थाना क्षेत्र के चर्चित दोहरे हत्याकांड में विशेष न्यायाधीश, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, रायगढ़ ने चार आरोपियों को दोषी ठहराते हुए दो-दो आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है। न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302/120-बी, 201/120-बी तथा एससी-एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(2)(v) के तहत यह फैसला सुनाया। यह निर्णय 31 जुलाई 2026 को पारित किया गया।
पुरानी रंजिश में दो लोगों की कर दी थी हत्या
अभियोजन के अनुसार, 19 जुलाई 2023 की रात करीब 10:30 बजे ग्राम गोढ़ी, थाना तमनार में पुरानी रंजिश के चलते आरोपियों ने पूर्व नियोजित षड्यंत्र के तहत अनुसूचित जनजाति वर्ग के राघुवन चौहान और उद्धव चौहान पर टांगी, डंडे व अन्य कठोर हथियारों से हमला कर दिया। गंभीर चोटों के कारण दोनों की मौत हो गई। वारदात के बाद आरोपियों ने साक्ष्य मिटाने की नीयत से एक मृतक के शव को मुख्य सड़क तक घसीटकर घटना को सड़क दुर्घटना का रूप देने का भी प्रयास किया। सूचना मिलने पर तमनार पुलिस ने तत्काल अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की।
तत्कालीन टीआई और एसडीओपी ने संभाली विवेचना
प्रकरण की प्रारंभिक विवेचना तत्कालीन थाना प्रभारी तमनार निरीक्षक आशीर्वाद राहटगांवकर ने की। विवेचना के दौरान घटनास्थल का निरीक्षण, साक्ष्य संकलन, आरोपियों से पूछताछ, मेमोरेण्डम के आधार पर हत्या में प्रयुक्त हथियारों एवं अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्यों की बरामदगी, वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्रित करने तथा गवाहों के बयान दर्ज किए गए।
एससी-एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत प्रकरण की अग्रिम विवेचना तत्कालीन एसडीओपी धरमजयगढ़ दीपक मिश्रा ने की। उन्होंने महत्वपूर्ण प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयान धारा 164 के तहत दर्ज कराए, फरार आरोपियों के संबंध में आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की, जाति संबंधी साक्ष्य जुटाए तथा विवेचना पूर्ण कर सुदृढ़ अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत कराया।
22 गवाह, 81 दस्तावेज और 20 भौतिक साक्ष्य बने आधार
राज्य शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक राजीव बेरीवाल ने प्रभावी पैरवी की। अभियोजन पक्ष ने न्यायालय में 22 गवाहों के बयान, 81 दस्तावेजी साक्ष्य और 20 भौतिक साक्ष्य (आर्टिकल/एक्जीबिट) प्रस्तुत किए। मजबूत साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने चारों आरोपियों को दोषी करार दिया।
कोर्ट ने सुनाई दो-दो आजीवन कारावास की सजा
विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम, रायगढ़ श्रीमती शोभना कोष्ठा ने चारों आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/120-बी, 201/120-बी तथा एससी-एसटी अधिनियम की धारा 3(2)(v) के तहत दोषसिद्ध करते हुए प्रत्येक को दो-दो आजीवन कारावास और अर्थदंड से दंडित किया।
चारों दोषी ग्राम गोढ़ी के निवासी
दोषियों में हरिलाल उरांव (33), मुकेश पडिहारी (41), जितेन्द्र पटनायक उर्फ जीतू (34) और गणेश पडिहारी (35) शामिल हैं। सभी ग्राम गोढ़ी, थाना तमनार, जिला रायगढ़ के निवासी हैं।
एसएसपी बोले- वैज्ञानिक विवेचना से मिल रही दोषसिद्धि
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रायगढ़ शशि मोहन सिंह ने जिले के सभी विवेचकों को गंभीर मामलों की वैज्ञानिक एवं तथ्यपरक विवेचना करने के निर्देश दिए हैं, ताकि न्यायालय में सशक्त साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों को कठोर दंड दिलाया जा सके। उन्होंने समंस एवं वारंटों की समयबद्ध तामिली सुनिश्चित करने पर भी विशेष जोर दिया। इस प्रकरण में भी सभी समंस एवं वारंटों की समय पर तामिली सुनिश्चित की गई।
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