
CBN36 रायगढ़। छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने अपने दो दिवसीय रायगढ़ प्रवास के पहले दिन जिला एवं विकासखंड स्तरीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब उनका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुंचे। इसके लिए सभी विभाग गंभीरता, जवाबदेही और आपसी समन्वय के साथ कार्य करें।
जिला कलेक्टोरेट में आयोजित बैठक में राज्यपाल ने जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, पौधरोपण, जैविक खेती, स्वच्छता, योग, टीबी उन्मूलन, शिक्षा, आजीविका, सहकारिता, सड़क सुरक्षा सहित 20 से अधिक विषयों पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना, कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशिमोहन सिंह भी मौजूद रहे।
जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने पर जोर

राज्यपाल ने कहा कि वर्षा जल की प्रत्येक बूंद का संरक्षण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने वर्षा जल संग्रहण, वाटर हार्वेस्टिंग और पारंपरिक जल स्रोतों जैसे कुएं एवं बावड़ियों के संरक्षण और पुनर्जीवन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण को जनभागीदारी का अभियान बनाया जाए, ताकि भूजल स्तर में स्थायी सुधार हो सके।
‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान से जुड़ने की अपील
बैठक के बाद राज्यपाल ने जिला कलेक्टोरेट परिसर में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधरोपण भी किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रकृति संरक्षण केवल पर्यावरण बचाने का प्रयास नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य की कुंजी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए अभियान की सराहना करते हुए लोगों से अपनी मां के सम्मान या स्मृति में एक पौधा लगाने और उसके संरक्षण का संकल्प लेने की अपील की।
बैठक में पौधरोपण अभियान की समीक्षा करते हुए उन्होंने अमृत सरोवर परिसरों में लगाए गए पौधों की स्थिति की जानकारी ली। अधिकारियों ने बताया कि जिले की औद्योगिक इकाइयों के सहयोग से 10 हजार पीपल के पौधे उपलब्ध कराए जा रहे हैं। राज्यपाल ने पौधारोपण को जनभागीदारी से जोड़ने और स्थानीय मृदा के अनुरूप वृक्षारोपण की कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए।
जैविक खेती और फसल विविधीकरण पर बल
राज्यपाल ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए जैविक खेती को बढ़ावा देने, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने तथा जीवामृत, कम्पोस्ट और अन्य जैविक तकनीकों के उपयोग को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। उन्होंने धान के साथ दलहन, तिलहन एवं अन्य लाभकारी फसलों को बढ़ावा देने तथा बड़े किसानों को डबरी निर्माण और मत्स्य पालन अपनाने की सलाह दी।
स्वच्छता, योग और टीबी उन्मूलन पर दिए निर्देश
उन्होंने सार्वजनिक शौचालयों के बेहतर रखरखाव और गैर-पुनर्चक्रणीय प्लास्टिक के उपयोग को हतोत्साहित करने पर जोर दिया। राज्यपाल ने विद्यालयों, छात्रावासों और अन्य संस्थानों में नियमित योग शिविर आयोजित करने के निर्देश देते हुए कहा कि योग को जीवनशैली का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
टीबी उन्मूलन अभियान की समीक्षा के दौरान उन्होंने निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। वहीं विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और आजीविका से जुड़े कार्यक्रमों को संवेदनशीलता के साथ लागू करने पर जोर दिया।
नालंदा लाइब्रेरी और महिला स्व-सहायता समूहों की सराहना
राज्यपाल ने जिले में संचालित नालंदा लाइब्रेरी की सराहना करते हुए इसे युवाओं के लिए उपयोगी पहल बताया। अधिकारियों ने बताया कि जिला मुख्यालय के अलावा धरमजयगढ़, तमनार, घरघोड़ा और लैलूंगा में भी नालंदा लाइब्रेरी स्थापित की जा रही है।
उन्होंने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्व-सहायता समूहों और ‘लखपति दीदी’ पहल की समीक्षा करते हुए महिलाओं को अधिक से अधिक स्वरोजगार और आयमूलक गतिविधियों से जोड़ने के निर्देश दिए।
नशामुक्ति, सड़क सुरक्षा और एनसीसी पर भी चर्चा
राज्यपाल ने नशामुक्ति अभियान को जनआंदोलन बनाने, प्रत्येक ग्राम पंचायत में नई सहकारी समितियों के गठन, दोपहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट पहनना सुनिश्चित कराने तथा स्कूल समय में भारी वाहनों के आवागमन पर नियंत्रण रखने के निर्देश दिए। उन्होंने भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी की सदस्य संख्या बढ़ाने और एनसीसी गतिविधियों को मजबूत करने पर भी जोर दिया।
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