बिलासपुर/ CBN 36 । शुक्रवार भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा के साथ श्री मंदिर एक सप्ताह बाद मौसी मां के घर से वापस लौटे। माता लक्ष्मी श्री मंदिर के पास बंद कर दिए थे और उन्होंने भगवान जगन्नाथ के लिए पट नहीं खोला।
ऐसे में भगवान जगन्नाथ ने रसगुल्ले और उपहार देकर रूठी पत्नी माता लक्ष्मी को माना कर श्री मंदिर में प्रवेश किया।
शुक्रवार को बहुदा यात्रा निकाली। लगभग 10 दिनों तक मौसी मां के घर से भगवान वापस अपने धाम लौटे। श्री जगन्नाथ मंदिर में पारंपरिक ‘लक्ष्मी-नारायण मिलन’ की रस्म श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुई। इस दौरान भगवान जगन्नाथ ने अपनी अर्धांगिनी माता लक्ष्मी को मनाने के लिए रसगुल्ला और विशेष उपहार भेंट किए। जिसके बाद उन्हें मंदिर में पुनः प्रवेश की अनुमति मिली।
इस अवसर पर श्री मंदिर के दोनो और भगवान जगन्नाथ और माता लक्ष्मी के दूतो के रूप में पांडे बैठी और उनकी और से संवाद किया। काफी मानने के बाद माता ने मंदिर के पट खोले और भगवान का सत्कार किया।
धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ मौसीबाड़ी की यात्रा पर जाते हैं। इस दौरान माता लक्ष्मी को साथ नहीं ले जाने से वे रुष्ट हो जाती हैं। जब भगवान जगन्नाथ वापस लौटते हैं तो मंदिर के द्वार उनके लिए बंद कर दिए जाते हैं। इसके बाद भगवान जगन्नाथ माता लक्ष्मी को रसगुल्ला और उपहार अर्पित कर उन्हें प्रसन्न करते हैं। माता लक्ष्मी के मान जाने के बाद मंदिर के द्वार खोले गाय और भगवान का पुनः प्रवेश हुआ।
मंदिर परिसर में रथयात्रा के बाद माता लक्ष्मी के बीच हुए इस सांकेतिक आयोजन के बड़ी संख्या में श्रद्धालु साक्षी बने। दांपत्य जीवन में प्रेम, सम्मान और मनुहार का संदेश दिया।
श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की।
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