
“रायगढ़ की पहचान उसके संस्कार हैं, न कि नशा और सट्टा। पुलिस की कार्रवाई तभी स्थायी परिणाम देगी, जब समाज स्वयं आगे आकर नशे और जुआ-सट्टा के विरुद्ध जनआंदोलन खड़ा करेगा। हमारा उद्देश्य केवल अपराध रोकना नहीं, बल्कि भटके युवाओं को मुख्यधारा में वापस लाना भी है”
रायगढ़, 4 जुलाई। “संस्कारों से युक्त रायगढ़, नशा-सट्टा से मुक्त रायगढ़” अभियान के तहत रायगढ़ पुलिस की ओर से शनिवार को नगर निगम ऑडिटोरियम में आयोजित ‘पुलिस जन संवाद’ कार्यक्रम में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने समाज से नशे और जुआ-सट्टा के खिलाफ जनआंदोलन खड़ा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पुलिस की कार्रवाई तभी स्थायी परिणाम देगी, जब समाज भी सक्रिय भागीदारी निभाएगा।
दो दिवसीय जनजागरूकता प्रदर्शनी एवं कार्यशाला के समापन अवसर पर आयोजित इस संवाद कार्यक्रम में कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी, महापौर जीवर्धन चौहान, जनप्रतिनिधि, अधिवक्ता, समाजसेवी, शिक्षाविद, मीडिया प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में नागरिक शामिल हुए।

कार्यक्रम का संचालन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल सोनी ने किया। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की परिकल्पना के अनुरूप इस पहल का उद्देश्य नागरिकों को एक मंच पर लाकर नशा और जुआ-सट्टा जैसी सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध सामूहिक अभियान खड़ा करना है।
अपने संबोधन में एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कहा कि रायगढ़ अपनी सांस्कृतिक विरासत और संस्कारों के लिए जाना जाता है, लेकिन हाल के समय में युवाओं और किशोरों के बीच बढ़ती नशे की प्रवृत्ति चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते इस पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया तो इसका दुष्प्रभाव आने वाली पीढ़ियों पर पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि रायगढ़ पुलिस केवल अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि नशे की लत से बाहर आए युवाओं को पुनर्वास, रोजगार और सम्मानजनक जीवन से जोड़ने की दिशा में भी समाज के सहयोग से काम करेगी।
एसएसपी ने कहा कि क्रिकेट सट्टा और अन्य प्रकार के सट्टे ने अनेक परिवारों को आर्थिक और सामाजिक रूप से नुकसान पहुंचाया है, जबकि नशे की वजह से युवा बार-बार अपराध की ओर लौट रहे हैं। इसी सोच के साथ जिले में “संस्कारों से युक्त रायगढ़, नशा-सट्टा से मुक्त रायगढ़” अभियान शुरू किया गया है।
कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने कहा कि नशे और जुआ-सट्टा पर प्रभावी नियंत्रण के लिए प्रशासन, पुलिस और समाज को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने नशे से प्रभावित लोगों के पुनर्वास में समाज की भागीदारी को सबसे महत्वपूर्ण बताया।
महापौर जीवर्धन चौहान ने कहा कि नशे के खिलाफ सामाजिक और नैतिक वातावरण तैयार करना जरूरी है। उन्होंने नागरिकों से अपने मोहल्लों और वार्डों से इस अभियान की शुरुआत करने तथा पुलिस को समय पर सूचना देकर सहयोग करने की अपील की।
नगर पुलिस अधीक्षक मयंक मिश्रा ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से बताया कि रायगढ़ पुलिस अवैध शराब, गांजा, नशीले पदार्थ, जुआ और क्रिकेट सट्टे के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है। उन्होंने बताया कि नशे के कारण सड़क दुर्घटनाओं और संपत्ति संबंधी अपराधों में वृद्धि होती है। किशोरों को नशीले पदार्थ उपलब्ध कराने वालों के खिलाफ किशोर न्याय अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की जा रही है।
जन संवाद में नागरिकों और विशेषज्ञों ने स्कूलों में वालंटियर तैयार करने, मेडिकल कॉलेज में नशामुक्ति एवं डि-एडिक्शन सेंटर स्थापित करने, नशा कारोबारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, सोशल मीडिया और व्हाट्सएप सूचना समूह बनाने, स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता अभियान चलाने तथा प्रत्येक गांव में “जन सूचना मित्र” नियुक्त करने जैसे सुझाव दिए।
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, समाजसेवियों और नागरिकों ने नशा मुक्त रायगढ़ बनाने का सामूहिक संकल्प लिया और नशा मुक्ति की शपथ ग्रहण की।
एसएसपी का संदेश
रायगढ़ की पहचान उसके संस्कार हैं, न कि नशा और सट्टा। पुलिस की कार्रवाई तभी स्थायी परिणाम देगी, जब समाज स्वयं आगे आकर नशे और जुआ-सट्टा के विरुद्ध जनआंदोलन खड़ा करेगा। हमारा उद्देश्य केवल अपराध रोकना नहीं, बल्कि भटके युवाओं को मुख्यधारा में वापस लाना भी है।
प्रधान संपादक


