महासमुंद के किसान हिमांशु बंजारे ने ढैंचा की हरी खाद अपनाकर पेश की मिसाल
रायपुर, 4 जुलाई। छत्तीसगढ़ में प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार के प्रयासों का असर अब ग्रामीण क्षेत्रों में दिखाई देने लगा है। कृषि विभाग के मार्गदर्शन में किसान पर्यावरण अनुकूल खेती की तकनीकों को अपनाते हुए खेती की लागत कम करने और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं।
महासमुंद जिले के बसना विकासखंड के ग्राम बड़ेसाजापाली निवासी किसान हिमांशु बंजारे ने अपने 0.80 हेक्टेयर कृषि रकबे में ढैंचा की हरी खाद की फसल लगाई है। करीब 30 दिन की हो चुकी इस फसल को निर्धारित समय पर खेत में पलटकर हरी खाद के रूप में उपयोग किया जाएगा। इससे भूमि की उर्वरता बढ़ेगी, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी और आगामी फसलों के उत्पादन में सुधार की संभावना है।
हिमांशु बंजारे ने बताया कि प्राकृतिक और जैविक खेती से खेती की लागत घटती है तथा मिट्टी की गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने कहा कि ढैंचा जैसी हरी खाद वाली फसलों के उपयोग से खेतों में प्राकृतिक रूप से पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ती है और खेती अधिक टिकाऊ बनती है। उन्होंने अन्य किसानों से भी इस पद्धति को अपनाने की अपील की।
उप संचालक कृषि एफ.आर. कश्यप ने बताया कि हरी खाद मिट्टी की उर्वरता और संरचना सुधारने का प्रभावी माध्यम है। ढैंचा, सन, लोबिया, उड़द, मूंग और ग्वार जैसी दलहनी फसलें कम समय में तैयार होकर कम लागत में अधिक मात्रा में जैविक पदार्थ उपलब्ध कराती हैं। इन फसलों को फूल आने से पहले खेत में पलटने पर प्रति हेक्टेयर लगभग 50 से 60 किलोग्राम तक नाइट्रोजन की पूर्ति होती है, जिससे रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता कम हो जाती है।
उन्होंने बताया कि हरी खाद के नियमित उपयोग से मिट्टी भुरभुरी होती है, जलधारण क्षमता बढ़ती है, वायु संचार बेहतर होता है और अम्लीय व क्षारीय भूमि का संतुलन भी सुधरता है। इससे मिट्टी में सूक्ष्मजीवों की सक्रियता बढ़ती है, मृदा क्षरण कम होता है तथा उत्पादन क्षमता में दीर्घकालिक वृद्धि होती है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों को कम लागत, टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल खेती के लिए प्रोत्साहित कर रही है। कृषि विभाग किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और जागरूकता उपलब्ध करा रहा है। इससे प्रदेश में प्राकृतिक और जैविक खेती का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
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