छत्तीसगढ़ रायगढ़। अपराध पर नियंत्रण केवल कानून की सख्ती से नहीं, बल्कि समाज की भागीदारी और सतत संवाद से भी संभव है। इसी सोच को केंद्र में रखकर रायगढ़ पुलिस के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशिमोहन सिंह ने “पुलिस जन संवाद” अभियान की शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य केवल अपराधियों पर कार्रवाई करना नहीं, बल्कि समाज में व्याप्त नशाखोरी और सट्टे जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जनजागरण का व्यापक वातावरण तैयार करना है।
4 जुलाई 2026 को नगर निगम ऑडिटोरियम में आयोजित “पुलिस जन संवाद” कार्यक्रम इसी जनभागीदारी आधारित पुलिसिंग का महत्वपूर्ण पड़ाव है। कार्यक्रम का मूल संदेश है— “जन संवाद, जन विश्वास, सुरक्षित समाज”। इसके माध्यम से पुलिस प्रशासन, जनप्रतिनिधियों, उद्योग जगत, सामाजिक संगठनों, महिला समूहों, बुद्धिजीवियों, मीडिया तथा आम नागरिकों को एक मंच पर लाकर सामाजिक चुनौतियों पर सामूहिक समाधान तलाशने का प्रयास किया जा रहा है।
एसएसपी शशिमोहन सिंह का मानना है कि नशा और सट्टा केवल कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं हैं, बल्कि यह परिवार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक संस्कारों को प्रभावित करने वाली गंभीर चुनौतियां हैं। यदि समाज स्वयं इन बुराइयों के विरुद्ध खड़ा हो जाए तो पुलिस की कार्रवाई अधिक प्रभावी और स्थायी परिणाम देने वाली बन सकती है।
कार्यक्रम की थीम “संस्कारों से युक्त रायगढ़, नशा-सट्टा मुक्त रायगढ़” इसी व्यापक सोच को प्रतिबिंबित करती है। “नशा छोड़ें, जीवन जोड़ें” तथा “सट्टा छोड़ें, समाज जोड़ें” जैसे संदेश केवल नारे नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना जगाने का प्रयास हैं। पुलिस का उद्देश्य युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाना, परिवारों को जागरूक करना तथा नागरिकों को कानून के साथ सामाजिक जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित करना है।
पिछले कुछ समय में रायगढ़ पुलिस ने अवैध शराब, मादक पदार्थों तथा सट्टे के खिलाफ लगातार अभियान चलाए हैं। लेकिन एसएसपी शशिमोहन सिंह का मानना है कि केवल छापेमारी और गिरफ्तारी से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। जब तक समाज स्वयं इन गतिविधियों को स्वीकार करना बंद नहीं करेगा, तब तक इन पर पूरी तरह अंकुश लगाना कठिन रहेगा। इसी कारण उन्होंने संवाद आधारित पुलिसिंग को प्राथमिकता दी है।
“पुलिस जन संवाद” कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, उद्योगपतियों, गैर-सरकारी संगठनों, सामाजिक संस्थाओं, महिला संगठनों और नागरिकों की भागीदारी इस बात का संकेत है कि नशामुक्त और सट्टामुक्त समाज का लक्ष्य केवल पुलिस का नहीं, बल्कि पूरे समाज का साझा दायित्व है।
एसएसपी शशिमोहन सिंह की यह पहल सामुदायिक पुलिसिंग की उस अवधारणा को मजबूत करती है जिसमें पुलिस और जनता के बीच विश्वास, सहयोग और संवाद को अपराध नियंत्रण का सबसे प्रभावी माध्यम माना जाता है। यदि समाज के सभी वर्ग इस अभियान से जुड़ते हैं तो रायगढ़ न केवल अपराध नियंत्रण में नई मिसाल कायम कर सकता है, बल्कि संस्कारवान, सुरक्षित, स्वच्छ, स्वस्थ और समृद्ध शहर बनने की दिशा में भी उल्लेखनीय कदम बढ़ा सकता है।
संवाद के माध्यम से विश्वास और विश्वास के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन की यह पहल आने वाले समय में रायगढ़ पुलिस की पहचान बन सकती है। यही कारण है कि “संवाद से समाधान” केवल कार्यक्रम की टैगलाइन नहीं, बल्कि एसएसपी शशिमोहन सिंह की कार्यशैली और जनकेंद्रित पुलिसिंग का स्पष्ट संदेश भी है।
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