रायपुर, 4 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ के 31 मार्च 2026 को माओवादी आतंक से मुक्त होने पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, शहीद जवानों और बस्तर की जनता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र, सुरक्षा बलों और स्थानीय जनता के सामूहिक संकल्प का परिणाम है।
मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन और दूरदर्शिता ने माओवादी हिंसा के खिलाफ निर्णायक अभियान को दिशा दी। उन्होंने वर्ष 2015 में दंतेवाड़ा में प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय युवाओं से हिंसा का रास्ता छोड़ने का आह्वान किया गया था।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रति आभार व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने उन्हें माओवादी उन्मूलन की रणनीति का प्रमुख शिल्पी बताया। उन्होंने कहा कि 31 मार्च 2026 तक माओवाद समाप्त करने का जो संकल्प लिया गया था, उसे दृढ़ता के साथ पूरा किया गया। उनके नेतृत्व में सुरक्षा बलों को स्पष्ट दिशा और आवश्यक संसाधन प्राप्त हुए।
शहीदों के बलिदान को किया नमन
मुख्यमंत्री ने शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनके सर्वोच्च बलिदान ने इस सफलता की नींव रखी। उन्होंने सुरक्षा बलों के साहस और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि जवानों ने अपनी जान की परवाह किए बिना माओवादी गतिविधियों पर निर्णायक प्रहार किया।
जनता का विश्वास बना सबसे बड़ी ताकत
मुख्यमंत्री साय ने बस्तर की जनता के योगदान को भी अहम बताया। उन्होंने कहा कि एक समय मतदान करने पर धमकियां दी जाती थीं, इसके बावजूद लोगों ने लोकतंत्र में विश्वास बनाए रखा। यही जनसमर्थन इस परिवर्तन का आधार बना।
उन्होंने कहा कि माओवादी हिंसा ने वर्षों तक अनेक परिवारों को प्रभावित किया, लेकिन यह संघर्ष केवल सुरक्षा बलों का नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के संकल्प का प्रतीक रहा।
डबल इंजन सरकार के प्रयासों का परिणाम
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद केंद्र सरकार की रणनीति और राज्य में डबल इंजन सरकार के गठन के पश्चात पिछले ढाई वर्षों में समन्वित प्रयासों से माओवाद का समूल नाश संभव हुआ।
उन्होंने यह भी बताया कि जिन्होंने हिंसा का मार्ग छोड़कर लोकतांत्रिक व्यवस्था को अपनाया, उनका सरकार ने स्वागत किया है। यह परिवर्तन सुरक्षा कार्रवाई के साथ-साथ विश्वास, पुनर्वास और विकास के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है।
अब ‘रेड कॉरिडोर’ नहीं, ‘ग्रीन कॉरिडोर’
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में अब एक नया दौर शुरू हो चुका है, जहां बच्चे निर्भय होकर शिक्षा ग्रहण करेंगे और विकास की रोशनी हर गांव तक पहुंचेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि अब प्रदेश में ‘रेड कॉरिडोर’ नहीं, बल्कि ‘ग्रीन कॉरिडोर’ का युग है और छत्तीसगढ़ एक समृद्ध भविष्य की ओर अग्रसर है।
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