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May 20, 2026 5:54 pm

सहायक उप निरीक्षक जयराम सिदार की सटीक विवेचना और मजबूत पैरवी से हत्या के आरोपी को उम्रकैद

“एसएसपी शशि मोहन सिंह सिंह ने कहा कि पुलिस की विवेचना का उद्देश्य आरोपियों को उनके कृत्य के अनुरूप कड़ी सजा दिलाना होना चाहिए, क्योंकि मजबूत विवेचना ही न्याय की आधारशिला है”

रायगढ़।चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश श्री विरेंद्र की अदालत ने हत्या के एक महत्वपूर्ण मामले में आरोपी सूरज राठिया 22 वर्ष निवासी ग्राम आमगांव थाना धरमजयगढ़, को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला 24 मार्च को सुनाया गया, जिसमें पिकअप चालक विरेन्द्र खम्हारी की हत्या के मामले में न्यायालय ने आरोपी को दोषी पाया।

इस मामले में प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना 22 अगस्त की रात थाना पूंजीपथरा क्षेत्र स्थित विंध्याचल ऑक्सीजन प्लांट की लेबर कॉलोनी में हुई थी। मृतक विरेन्द्र खम्हारी (30 वर्ष), निवासी ग्राम लुकापारा सरिया, प्लांट में पिकअप चालक के रूप में कार्यरत था, जबकि आरोपी सूरज राठिया वहीं खलासी का कार्य करता था। दोनों के बीच पूर्व से परिचय था। घटना के दिन उधारी के पैसों को लेकर विवाद बढ़ा, जिसके बाद आरोपी ने टांगी से हमला कर विरेन्द्र को गंभीर रूप से घायल कर दिया। अस्पताल ले जाते समय उसकी मृत्यु हो गई।

सूचना मिलते ही तत्कालीन थाना प्रभारी पूंजीपथरा निरीक्षक राकेश मिश्रा पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और आरोपी की तलाश शुरू की। फरार आरोपी को उसके क्वार्टर लौटने पर घेराबंदी कर गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उसने अपराध स्वीकार किया।

प्रकरण की प्रारंभिक विवेचना निरीक्षक राकेश मिश्रा द्वारा की गई, जिसे आगे सहायक उप निरीक्षक जयराम सिदार ने संभाला। विवेचना के दौरान वैज्ञानिक साक्ष्य, घटनास्थल से प्राप्त प्रमाण, एफएसएल रिपोर्ट और गवाहों के सशक्त बयान न्यायालय में प्रस्तुत किए गए। साक्ष्यों की मजबूती और गवाहों के अडिग बयान ने अभियोजन पक्ष के मामले को सुदृढ़ बनाया।

अभियोजन की ओर से अपर लोक अभियोजक सुश्री वंदना केशरवानी ने प्रभावी पैरवी की, जिसके परिणामस्वरूप न्यायालय ने आरोपी को दोषसिद्ध कर आजीवन कारावास की सजा सुनाई। यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत प्रभावी विवेचना और सशक्त अभियोजन का उदाहरण माना जा रहा है।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आईपीएस शशि मोहन सिंह के मार्गदर्शन में जिले में विवेचना की गुणवत्ता सुधारने के लिए विशेष पहल की गई है। विवेचकों के लिए बनाए गए व्हाट्सएप समूह के माध्यम से अनुसंधान संबंधी समस्याओं पर वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा मार्गदर्शन दिया जाता है, जिससे मामलों के निष्पादन में तेजी और सटीकता आई है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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