
“डीआईजी एवं एसएसपी रजनेश सिंह ने कहा कि यह घटना एक बार फिर यह बताती है कि पल भर का गुस्सा किस तरह दो परिवारों की जिंदगी बर्बाद कर सकता है। एक ओर जहां एक व्यक्ति की जान चली गई, वहीं दूसरी ओर छह लोग सलाखों के पीछे पहुंच गए।ऐसी स्थिति से बचने का प्रयास करना चाहिए”
छत्तीसगढ़ ।बिलासपुर जिले के कोटा थाना क्षेत्र में होली के दौरान शुरू हुआ एक मामूली विवाद हत्या जैसी गंभीर घटना में बदल गया। होलिका दहन के लिए लकड़ी चोरी के आरोप को लेकर शुरू हुआ झगड़ा इतना बढ़ा कि एक व्यक्ति की जान चली गई, जबकि दूसरे पक्ष के छह लोग जेल पहुँच गए।
इस मामले में पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम करगीखुर्द निवासी मोहन पाण्डेय और आरोपी पक्ष के बीच पहले लकड़ी चोरी को लेकर विवाद हुआ था। बताया गया कि इसी बात पर कहासुनी और मारपीट भी हुई थी। इस घटना से क्षुब्ध होकर आरोपियों ने बदला लेने की योजना बनाई।

22 मार्च 2026 को आरोपियों ने पूर्व नियोजित तरीके से मोहन पाण्डेय के घर पहुँचकर उस पर टंगिया, लाठी-डंडों से हमला कर दिया। हमले में सिर पर गंभीर चोट लगने से मोहन पाण्डेय की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद आरोपियों ने शव को घसीटकर आंगन में फेंक दिया।
इस दौरान मृतक के साथी शरद कौशिक ने घटना को देखा। जब वह बचने के लिए भागने लगा, तो आरोपियों में शामिल एक व्यक्ति ने उसके सिर पर भी लाठी से वार किया। हालांकि वह किसी तरह जान बचाकर भागने में सफल रहा।
घटना की रिपोर्ट दर्ज होने के बाद कोटा पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए 23 मार्च 2026 को सभी छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के कब्जे से एक लोहे का टंगिया और लकड़ी का फंटा जब्त किया गया है।
गिरफ्तार आरोपियों में राजाराम साहू, देवीप्रसाद साहू, प्रदीप साहू, आशा बाई साहू, वृंदा बाई साहू और चैतराम साहू शामिल हैं। सभी को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।
इस मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया है। पूरी कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण और एसडीओपी कोटा नुपूर उपाध्याय के मार्गदर्शन में की गई।
पुलिस टीम में निरीक्षक नरेश चौहान, प्रधान आरक्षक सत्य प्रकाश यादव, आरक्षक धर्मेंद्र साहू, संजय श्याम और दीप सिंह कंवर की विशेष भूमिका रही।
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