
बिलासपुर।जिले में मादक पदार्थों के विरुद्ध पुलिस द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान के दौरान सामने आए मामलों ने समाज के सामने एक गंभीर प्रश्न खड़ा कर दिया है। अब तक पुरुष-प्रधान माने जाने वाले नशे के अवैध कारोबार में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी सामने आना सामाजिक संरचना में हो रहे बदलाव और अपराध के नए स्वरूप की ओर संकेत करता है।

पुलिस कार्रवाई में गिरफ्तार 12 आरोपियों में तीन महिलाएं शामिल होना केवल एक संयोग नहीं, बल्कि बदलती परिस्थितियों का संकेत माना जा रहा है। थाना सरकंडा, सीपत एवं कोनी क्षेत्रों से पकड़ी गई महिला आरोपियों के पास से गांजा एवं प्रतिबंधित नशीली टेबलेट की बरामदगी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नशे का नेटवर्क अब पारंपरिक दायरों से बाहर निकल चुका है।

पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का ऐसा मानना है कि तस्कर गिरोह अब महिलाओं को कम संदेह का लाभ उठाकर मादक पदार्थों की तस्करी एवं विक्रय में आगे कर रहे हैं। घरेलू जिम्मेदारियों, आर्थिक दबाव एवं त्वरित कमाई के लालच को आधार बनाकर महिलाओं को इस अवैध धंधे में जोड़ा जा रहा है।
सामाजिक विशेषज्ञों की माने तो कि यह स्थिति केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक असंतुलन का परिणाम भी है। सीमित रोजगार अवसर, पारिवारिक तनाव और अपराधियों द्वारा किया गया संगठित प्रलोभन महिलाओं को इस ओर धकेल रहा है।

एएसपी पंकज पटेल ने स्पष्ट किया है कि मादक पदार्थों के अपराध में संलिप्त किसी भी व्यक्ति के प्रति कानून में कोई भेदभाव नहीं है। महिला आरोपियों के विरुद्ध भी एनडीपीएस एक्ट की कठोर धाराओं के तहत वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
इस प्रवृत्ति को रोकने के लिए केवल पुलिस कार्रवाई पर्याप्त नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता, परिवार की भूमिका और आर्थिक सशक्तिकरण भी आवश्यक है। अन्यथा यह प्रवृत्ति आने वाले समय में समाज के लिए और अधिक घातक सिद्ध हो सकती है।
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