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January 19, 2026 8:45 pm

हाई कोर्ट ने राज्य सूचना आयोग के आदेश को किया निरस्त, तीन अधिकारियों की गोपनीय जानकारी देने से किया मना

बिलासपुर। हाई कोर्ट ने कहा है कि न्यायिक अधिकारियों से जुड़ी गोपनीय और व्यक्तिगत जानकारी सूचना का अधिकार के तहत सार्वजनिक नहीं की जा सकती। जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की सिंगल बेंच ने राज्य सूचना आयोग के आदेश को निरस्त कर दिया है। आयोग ने हाई कोर्ट प्रशासन को तीन न्यायिक अधिकारियों से संबंधित शिकायतों, नियुक्ति दस्तावेजों और विभागीय जांच की जानकारी देने के निर्देश दिए थे।

चिरमिरी निवासी राजकुमार मिश्रा ने आरटीआई के तहत प्रदेश के तीन न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ की गई शिकायतों, नौकरी पाने के लिए दिए गए प्रमाणपत्रों और विभागीय जांच से जुड़ी जानकारी मांगी थी। हाई कोर्ट के जनसूचना अधिकारी ने आवेदन खारिज कर दिया था। प्रथम अपील भी नामंजूर हो गई थी। इसके बाद राज्य सूचना आयोग ने दूसरी अपील स्वीकार करते हुए जानकारी देने के आदेश दिए थे। इस पर हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल और जनसूचना अधिकारी ने हाई कोर्ट में याचिका लगाई थी। हाई कोर्ट के सिंगल बेंच ने कहा है कि न्यायिक अधिकारियों से जुड़ी जानकारी व्यक्तिगत की श्रेणी में आती है। ऐसी जानकारी का किसी सार्वजनिक हित से सीधा संबंध नहीं है। इसके अलावा आरटीआई एक्ट की धारा 8 (1) (j) के तहत यह जानकारी देने से छूट प्राप्त है। न्यायिक अधिकारियों और हाईकोर्ट के बीच का संबंध विश्वास आधारित होता है। हाई कोर्ट ने कहा कि न्यायिक अधिकारी सामान्य सरकारी कर्मचारी नहीं होते। उनकी नियुक्ति, गोपनीय रिपोर्ट और अनुशासनात्मक नियंत्रण संविधान के अनुच्छेद 235 के तहत हाई कोर्ट के पास होता है। ऐसी जानकारी सार्वजनिक करने से न्यायपालिका की स्वतंत्रता और अनुशासन प्रभावित हो सकता है। हाई कोर्ट ने याचिका मंजूर करते हुए राज्य सूचना आयोग के सभी आदेशों को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि जब तक आवेदक यह साबित न करे कि जानकारी मांगने के पीछे बड़ा सार्वजनिक हित है, तब तक ऐसी सूचनाएं नहीं दी जा सकतीं।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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