बिलासपुर। कांग्रेस में संगठन सृजन के महत्वपूर्ण और पहला दौर पूरा हो गया है। जिला व शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्षों की नियुक्ति अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने कर दी है। अब बारी ब्लॉक अध्यक्षों की है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव व प्रदेश कांग्रेस प्रभारी सचिन पायलट छत्तीसगढ़ के दौरे पर कल आ रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के प्रवास के मद्देनजर अब ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्षों की नियुक्ति की चर्चा छिड़ गई है। इस बात की भी अटकलें लगाई जा रही है कि पूर्व के जिला व शहर अध्यक्षों की अनुशंसा को रद्दी की टोकरी में डाल दिया गया है।
कांग्रेस के संगठनात्मक प्रभारी और रणनीतिकार यह अच्छी तरह जानते हैं कि संगठन सृजन के तहत प्रदेश के अमूमन सभी जिलों में जिला व शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्षों की नियुक्ति कर दी गई है। अध्यक्षों को अपनी टीम बनाने की आजादी भी मिलेगी। इस बीच ब्लाॅक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर अब भीतर ही भीतर सुगबुगाहट भी होने लगी है। चर्चा तो इस बात की भी हो रही है कि ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्षों की नियुक्ति से पहले नए अध्यक्षों से उनकी पंसद,नापंसद के अलावा पैनल में शामिल नामों को लेकर रायशुमारी की जाएगी। माना जा रहा है कि नए अध्यक्षों की पसंद को तव्वजो भी मिलेगी। कारण साफ है, विधानसभा और लोकसभा चुनाव तक जिला व शहर अध्यक्ष अपनी टीम के साथ काबिज रहेंगे। राज्य व केंद्र सरकार के खिलाफ शहर से लेकर जिला व प्रदेश में माहौल बनाने की भूमिका भी इनकी टीम को ही निभानी है। लिहाजा इनकी पसंद को तव्वजो मिलना तय माना जा रहा है।
बता दें कि संगठन सृजन से पहले अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की ओर से जिले में भेजे गए पर्यवेक्षकों ने शहर व जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्षों व वरिष्ठ कांग्रेसजनों से रायशुमारी के बाद ब्लॉक अध्यक्षों के नामों का पैनल भी तैयार किया था। जिला व शहर अध्यक्षों के साथ ही ब्लॉक अध्यक्षों के नाम का पैनल एआईसीसी को सौप दिया था। तब और अब की राजनीतिक परिस्थितियों में अंतर आ गया है। तब पूर्व के अध्यक्षों ने अपनी पसंद और मौजूदा सियासत को देखते हुए नामों का पैनल तैयार किया था। परिस्थितियां अब पूरी तरह बदली हुई है। बदली राजनीतिक परिस्थितियों में मौजूदा अध्यक्षों की पसंद का ख्याल रखा जाएगा। जाहिरतौर पर उनकी पसंद पर ही मुहर लगेगी।
एआईसीसी के महासचिव व प्रदेश कांग्रेस प्रभारी पायलट की मौजूदगी में रायशुमारी का दौर प्रारंभ होगा। पर्यवेक्षकों द्वारा बनाए गए नामों के पैनल पर विचार किया जाएगा या फिर इसे रद्दी की टोकरी में डाल दी जाएगी। फिलहाल इस पर कोई नीतिगत निर्णय नहीं हो पाया है। इसे लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि नए सिरे से दावेदारों के नामों पर विचार किया जाएगा।
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