हिंदी विश्वविद्यालय ने दी श्रद्धांजलि,कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने कहा विनोद कुमार शुक्ल का निधन साहित्य जगत के लिए अपूरणीय क्षति
वर्धा।महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय ने वरिष्ठ साहित्यकार और ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित कवि-लेखक विनोद कुमार शुक्ल के निधन पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। विश्वविद्यालय की ओर से बुधवार को ऑनलाइन माध्यम से आयोजित श्रद्धांजलि सभा में कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने कहा कि विनोद कुमार शुक्ल का निधन साहित्य जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। अनवरत लेखन करने वाले इस लेखक की कलम भले ही थम गई हो, लेकिन वे अपनी रचनाओं के माध्यम से सदैव जीवित रहेंगे। उनकी समृद्ध साहित्यिक विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनी रहेगी।
इस अवसर पर उपस्थित शिक्षकों, अधिकारियों एवं विद्यार्थियों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत साहित्यकार को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा उनके परिजनों को इस दुःख की घड़ी में आत्मिक बल प्रदान करने की कामना की।
उल्लेखनीय है कि हिंदी साहित्य के शिखर पुरुष विनोद कुमार शुक्ल लंबे समय से अस्वस्थ थे। उन्होंने मंगलवार, 23 दिसंबर को एम्स, रायपुर में अंतिम सांस ली। 21 नवंबर को ही उन्हें साहित्य के सर्वोच्च सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
1 जनवरी 1937 को छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में जन्मे विनोद कुमार शुक्ल हिंदी साहित्य के उन विरल रचनाकारों में रहे, जिनकी रचनाएं बिना शोर किए बहुत दूर तक असर छोड़ती हैं। उनके लेखन में जीवन के साधारण क्षणों से असाधारण अर्थ प्रकट होते हैं।
उनका पहला कविता संग्रह ‘लगभग जय हिंद’ वर्ष 1971 में प्रकाशित हुआ। ‘वह आदमी चला गया नया गरम कोट पहिनकर विचार की तरह’, ‘सब कुछ होना बचा रहेगा’, ‘कविता से लंबी कविता’, ‘आकाश धरती को खटखटाता है’ जैसी कृतियों ने हिंदी कविता की दिशा को नया आयाम दिया।
गद्य में भी उनकी उपस्थिति उतनी ही सशक्त रही। वर्ष 1979 में प्रकाशित उपन्यास ‘नौकर की कमीज’, जिस पर प्रसिद्ध फिल्मकार मणि कौल ने फिल्म बनाई, हिंदी उपन्यास की भाषा और दृष्टि को नई जमीन प्रदान करता है। ‘खिलेगा तो देखेंगे’, ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’, ‘एक चुप्पी जगह’ जैसे उपन्यासों तथा ‘पेड़ पर कमरा’, ‘महाविद्यालय’, ‘घोड़ा और अन्य कहानियां’ जैसे कहानी संग्रहों ने उन्हें हिंदी साहित्य का अनिवार्य नाम बना दिया।
विनोद कुमार शुक्ल की रचनाएं अनेक भारतीय एवं विदेशी भाषाओं में अनूदित हुई हैं। उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार, गजानन माधव मुक्तिबोध फेलोशिप, रज़ा पुरस्कार, शिखर सम्मान, राष्ट्रीय मैथिलीशरण गुप्त सम्मान, दयावती मोदी कवि शेखर सम्मान, हिंदी गौरव सम्मान तथा 2023 में पैन-नाबोकोव पुरस्कार सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया।
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